नंदन नीलेकणि

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कौन हैं नंदन नीलेकणी? आधार के जनक से परीक्षा सुधार टास्क फोर्स तक का सफर….

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जानिए नंदन नीलेकणी कौन हैं? इन्फोसिस की स्थापना, आधार प्रोजेक्ट में योगदान, पद्म भूषण सम्मान और परीक्षा सुधार मोदी सरकार में जिम्मेदारी।

आज हम बात कर रहे हैं भारत के उस दूरदर्शी टेक-दिग्गज की, जिन्होंने देश की डिजिटल तक़दीर को एक नई दिशा दी है नंदन नीलेकणी। इन्फोसिस के सह-संस्थापक से लेकर देश की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली ‘आधार’ के शिल्पकार तक, नंदन नीलेकणी का सफ़र भारत के आधु

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निक और तकनीकी विकास की एक अनूठी कहानी।

कौन हैं नंदन मोहनराव नीलेकणी?

नंदन मोहनराव नीलेकणी का जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ। उनका मूल परिवार कर्नाटक के सिरसी का रहने वाला है। बेंगलुरु के प्रतिष्ठित बिशप कॉटन बॉयज़ स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने 1978 में देश के शीर्ष संस्थान IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की। IIT से निकलने के ठीक बाद, 1978 में उन्होंने पाटनी कंप्यूटर सिस्टम्स में अपने करियर की शुरुआत की। दिलचस्प बात यह है कि वहाँ उनका इंटरव्यू खुद एन.आर. नारायण मूर्ति ने लिया था। यहीं से उस ऐतिहासिक साझेदारी की नींव पड़ी जिसने आगे चलकर भारतीय IT उद्योग का नक्शा बदल दिया।

नंदन नीलेकणी का इन्फोसिस में योगदान

वर्ष 1981 में नंदन नीलेकणी ने नारायण मूर्ति और अन्य पाँच साथियों के साथ मिलकर इन्फोसिस की स्थापना की। वे 2002 से 2007 तक कंपनी के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर रहे। उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व का ही परिणाम है कि आज इन्फोसिस वैश्विक स्तर पर भारत का परचम लहरा रही है।

लेकिन नंदन नीलेकणी केवल कॉर्पोरेट जगत तक सीमित नहीं रहे। 2009 में केंद्र सरकार ने उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया। यहाँ उन्होंने ‘आधार’ प्रोजेक्ट की कमान संभाली एक ऐसी प्रणाली जिसने देश के हर नागरिक को एक विशिष्ट बायोमेट्रिक पहचान दी। आधार के सफल कार्यान्वयन ने उन्हें आधार का जनक बना दिया और भारतीय गवर्नेंस में तकनीक के इस्तेमाल की एक नई क्रांति ला दी।

नंदन नीलेकणी का राजनीतिक जीवन

जीवन के हर मोड़ पर सफलता देखने वाले नीलेकणी को राजनीति में एक संक्षिप्त और असफल अध्याय का सामना भी करना पड़ा। 2014 के लोकसभा चुनाव में वे कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण सीट से मैदान में उतरे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और अपना पूरा ध्यान परोपकार, सामाजिक बदलाव और भारतीय स्टार्टअप्स को नई ऊँचाइयों पर ले जाने में लगा दिया।

परोपकारी नंदन नीलेकणी

परोपकार के क्षेत्र में उनका और उनकी पत्नी रोहिणी नीलेकणी का योगदान मिसाल के तौर पर देखा जाता है। 2017 में इस दंपत्ति ने वैश्विक अभियान ‘गिविंग प्लेज’ पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत उन्होंने अपनी संपत्ति का आधा हिस्सा सामाजिक कार्यों के लिए दान करने का संकल्प लिया। शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी बदलाव लाने के लिए उन्होंने ‘EkStep’ नामक गैर-लाभकारी संस्था की शुरुआत की, जो तकनीक के ज़रिये बच्चों के सीखने की क्षमता को बेहतर बना रही है।

‘पद्म भूषण’ से सम्मानित

उनके इस अतुलनीय योगदान के लिए वर्ष 2006 में उन्हें भारत सरकार द्वारा देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, फोर्ब्स एशिया और फॉर्च्यून जैसी वैश्विक पत्रिकाओं ने उन्हें ‘बिज़नेसमैन ऑफ द ईयर’ के ख़िताब से नवाज़ा। ‘इमैजिनिंग इंडिया’ और ‘रीबूटिंग इंडिया’ जैसी उनकी पुस्तकें भारत के भविष्य का एक सशक्त रोडमैप पेश करती हैं

पीएम मोदी ने जताया विशवास

हालिया घटनाक्रमों की बात करें तो, NEET UG परीक्षा विवाद और प्रशासनिक फेरबदल के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय टास्क फ़ोर्स के गठन की घोषणा की है। जिस तरह उन्होंने आधार के ज़रिये देश की पहचान प्रणाली को पारदर्शी बनाया, ठीक उसी तरह अब उन पर देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और परीक्षा प्रणाली में जन-विश्वास को पुनर्स्थापित करने की एक बड़ी ज़िम्मेदारी है।

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