CJP का संसद मार्च: लाठीचार्ज के बाद क्या निकला सरकार से हुई बैठक का नतीजा? आंदोलन का भविष्य क्या?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का 20 जुलाई को संसद मार्च था। इस दौरान छात्रों पर जमकर लाठियां बरसाई गईं। लाठीचार्ज के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के दो प्रतिनिधियों ने सरकार से मुलाकात भी की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। ऐसे में अब सवाल उठता है कि सरकार के साथ हुई बैठक का लब्बोलुआब क्या रहा और अब इस आंदोलन का भविष्य क्या होगा?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज 32वें दिन भी प्रदर्शन जारी है। दोपहर तक हजारों की संख्या में आंदोलनकारी फिर से जंतर-मंतर पर मौजूद रहे। सुबह कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों को नाश्ता बांटा।
उधर, आज सुबह जब सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस पहुंची तो CJP समर्थकों ने “हाय-हाय” के नारे लगाए।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, “हम आज संसद मार्च इसलिए नहीं निकाल रहे हैं, क्योंकि इस सरकार और पुलिस ने छात्रों का खून बहाया है। इन्हें छात्रों की कोई परवाह नहीं है, लेकिन हमें है।”
सोनम वांगचुक आज भी अनशन पर हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई देखने के बाद उन्होंने अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया है।
इससे पहले संसद मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने सोमवार देर शाम जंतर-मंतर खाली करा लिया था, लेकिन आंदोलनकारी देर रात फिर से एकत्रित हो गए।
इस बीच एनडीए संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पेपर लीक मामले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।
सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल निचले स्तर के आरोपियों पर कार्रवाई करके सरकार यह मान रही है कि आंदोलन खत्म हो जाएगा? फिलहाल ऐसा होता हुआ नहीं दिख रहा।
राहुल गांधी ने कहा कि इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अलावा प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को भी इस्तीफा देना चाहिए तथा छात्रों से माफी मांगनी चाहिए। उनके मुताबिक इस मामले में जवाबदेही तय होना जरूरी है।
इससे पहले जेपी नड्डा से CJP के दो प्रतिनिधियों ने मुलाकात की थी। CJP के प्रवक्ता सौरव दास और दूसरे प्रवक्ता आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से उनके आवास पर मुलाकात की।
दोनों के बीच दो चरणों में बैठक हुई। पहली बैठक दोपहर 12 बजे जेपी नड्डा के आवास पर हुई।
इस दौरान नड्डा ने CJP प्रतिनिधियों से उनकी मांगों के बारे में पूछा और उन्हें लिखित रूप में मांगें देने को कहा।
इसके बाद शाम चार बजे दोनों प्रतिनिधि दोबारा जेपी नड्डा से मिले। इस दौरान उन्होंने तीन मांगें लिखित रूप में सौंपीं।
1. पहली मांग थी कि सोनम वांगचुक को रिहा किया जाए और उनकी यात्राओं पर किसी भी तरह की रोक न लगाई जाए।
2. दूसरी मांग थी कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए।
3. तीसरी मांग थी कि NEET-2026 पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
इन तीनों मांगों पर सरकार की ओर से कोई आश्वासन नहीं दिया गया। सबसे बड़ी बात यह रही कि एक तरफ सरकार और प्रतिनिधियों के बीच बातचीत चल रही थी, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाई जा रही थीं।
हालांकि यह आंदोलन अब कितने समय तक चलेगा, यह कहना फिलहाल मुश्किल है। क्योंकि सरकार धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेने के पक्ष में दिखाई नहीं दे रही। वहीं मुआवजे के मुद्दे पर भविष्य में किसी समझौते की संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर, सोनम वांगचुक का अनशन कब तक जारी रहेगा, इस पर भी सभी की नजर बनी हुई है।
यह भी पढ़ें- Haryana Border Sealed: किसानों का दिल्ली कूच! हरियाणा के 12 जिलों में पुलिस का सख्त पहरा
You may also like
-
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार, कहा- लाठी चार्ज के वीडियो देखने का समय नहीं है!
-
UCC बिल पास होने के बाद सीएम मोहन यादव के बयान पर छिड़ी सियासी बहस!
-
मोहन सरकार का बड़ा एक्शन, पतंजलि, रिलायंस समेत कई कंपनियों से वापस ली जाएगी औद्योगिक जमीन
-
CJP का प्रदर्शन जारी- 16 मेट्रो स्टेशन बंद, CJP का दावा सरकार ने बढ़ाया बातचीत का हाथ, अभी तक की 5 बड़ी खबरें जानिए….
-
संसद में छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, कार्यवाही बार-बार बाधित हुई!
