अगर कोई सत्ताधारी दल से है तो क्या वह नियमों से ऊपर हो जाएगा?

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अगर कोई सत्ताधारी दल से है तो क्या वह नियमों से ऊपर हो जाएगा?

क्या वह हेलमेट न लगाए, सीट बेल्ट न लगाए और पुलिस उसका चालान भी न काटे… आखिर क्यों? क्या आम जनता के लिए अलग नियम हैं और बीजेपी नेताओं के लिए अलग नियम?

मामला भोपाल का है, जहां बीजेपी मंडल अध्यक्ष बिना हेलमेट बाइक चला रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका तो उन्होंने बीजेपी जिला उपाध्यक्ष को फोन लगा दिया। ट्रैफिक टीआई संजय सूर्यवंशी ने फोन पर बात करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई। आरोप है कि नेता जी फॉर्च्यूनर लेकर मौके पर पहुंच गए और वर्दी उतरवा देने तक की धमकी दी।

राजधानी भोपाल में ट्रैफिक पुलिस की हेलमेट चेकिंग के दौरान बीजेपी जिला उपाध्यक्ष अभय पंडित और ट्रैफिक टीआई संजय सूर्यवंशी के बीच तीखी बहस हो गई। पुलिस कंट्रोल रूम तिराहे पर करीब ढाई मिनट तक दोनों के बीच नोकझोंक होती रही। इस दौरान अभय पंडित ने ट्रैफिक पुलिस पर वाहन चालकों से “चौथ वसूली” करने का आरोप लगाया।

टीआई ने उन्हें कार्रवाई में बाधा न डालने और पुलिसकर्मियों से बदसलूकी न करने की नसीहत दी। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

बताया जा रहा है कि भोपाल के कंट्रोल रूम तिराहे पर ट्रैफिक पुलिस हेलमेट चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान बिना हेलमेट बाइक चला रहे एक बीजेपी कार्यकर्ता को पुलिस ने रोक लिया।

कार्यकर्ता ने ट्रैफिक टीआई से बीजेपी जिला उपाध्यक्ष अभय पंडित की फोन पर बात कराने की कोशिश की, लेकिन टीआई ने फोन पर बात करने से इनकार कर दिया। इसके बाद अभय पंडित स्वयं मौके पर पहुंच गए।

मौके पर पहुंचते ही दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। वायरल वीडियो में अभय पंडित ट्रैफिक पुलिस पर वाहन चालकों से अवैध वसूली और “चौथ वसूली” करने के आरोप लगाते दिखाई दे रहे हैं।

वहीं ट्रैफिक टीआई संजय सूर्यवंशी लगातार उन्हें समझाते रहे कि पुलिस नियमों के तहत कार्रवाई कर रही है और किसी भी सरकारी कार्रवाई में हस्तक्षेप उचित नहीं है।

वीडियो में टीआई यह कहते भी सुनाई दे रहे हैं कि पुलिसकर्मियों से बदसलूकी न करें और सरकारी कार्य में बाधा न डालें, अन्यथा उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।

बहस के दौरान अभय पंडित यह कहते भी नजर आए कि, “अभी कुछ दिन पहले ही एक टीआई सस्पेंड हुई है।” इस पर टीआई ने जवाब दिया, “हमें भी करा दो।” इसके बाद कुछ देर तक दोनों के बीच तीखी नोकझोंक चलती रही।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने ट्रैफिक कार्रवाई और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए नियम अलग हैं? अगर नहीं, तो फिर नेता खुद को कानून से ऊपर क्यों समझते हैं?

और ऐसे नेताओं पर संगठन कार्रवाई क्यों नहीं करता? सत्ता का सुरूर और गुरूर अगर कानून से ऊपर हो जाए, तो लोकतंत्र और कानून के राज पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है

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