अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी पर ईरानी ड्रोन का हमला, वैश्विक तेल बाज़ार पर पड़ सकता है असर!

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अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी पर ईरानी ड्रोन का हमला, वैश्विक तेल बाज़ार पर पद सकता है असर!

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco की एक अहम रिफाइनरी पर ईरानी ड्रोन हमले की खबर सामने आई है। हमले के बाद कंपनी ने एहतियातन अपनी Ras Tanura Oil Refinery को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

बताया जा रहा है कि ड्रोन हमले के कारण रिफाइनरी परिसर में आग लग गई थी, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से उत्पादन रोकने का फैसला लिया गया। इस घटना ने वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को लेकर नई चिंताऐं खड़ी कर दी है।

रास तनुरा रिफाइनरी क्यों है इतनी अहम?

रास तनुरा रिफाइनरी सऊदी अरामको की सबसे बड़ी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रिफाइनरियों में गिनी जाती है। यह न केवल सऊदी अरब बल्कि दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यात टर्मिनलों मैं से एक है।

यहां से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति कई देशों को की जाती है। ऐसे में इस रिफाइनरी का बंद होना अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर सीधा असर डाल सकता है, खासकर उस समय जब पश्चिम एशिया पहले से ही संघर्ष की आग में घिरा हुआ है।

दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको

अरामको को दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी माना जाता है। 2025 की शुरुआत में कंपनी का कुल हाइड्रोकार्बन उत्पादन करीब 12.5 से 12.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा। कंपनी अब भी अधिकतम 12 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल उत्पादन करने की क्षमता बनाए हुए है।

स्वामित्व की बात करें तो अरामको में 81 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी सऊदी अरब सरकार के पास है, जबकि सऊदी अरब के सॉवरेन वेल्थ फंड, पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (PIF) के पास लगभग 16 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी 2019 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी।

मार्केट कैप और रेवेन्यू में भी अव्वल

वर्तमान में सऊदी अरामको की मार्केट कैपिटल करीब 6.32 लाख करोड़ सऊदी रियाल बताई जा रही है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 154 लाख करोड़ रुपए के बराबर है।

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने 2025 में करीब 42 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले वर्षों की तुलना में लगातार मजबूती को दर्शाता है। यही वजह है कि अरामको पर किसी भी तरह का हमला पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन जाता है। 

मुकेश अंबानी और रिलायंस से खास कनेक्शन

सऊदी अरामको का भारत से भी गहरा कारोबारी रिश्ता है। Mukesh Ambani की Reliance Industries Limited गुजरात की जामनगर रिफाइनरी के लिए अरामको से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करती है।

अरामको दो दशकों से अधिक समय से रिलायंस की प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता रही है। हालांकि रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स बिजनेस में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की 15 अरब डॉलर की प्रस्तावित डील 2021 में रद्द कर दी गई थी। इसके बावजूद दोनों कंपनियों के बीच कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर व्यावसायिक संबंध अब भी बने हुए हैं।

ईरानी ड्रोन हमले के बाद अरामको की रिफाइनरी बंद होने की घटना ने यह साफ कर दिया है कि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष का असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और तेल कीमतों पर भी गहराई से पड़ सकता है।

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