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.. महुआ मोइत्रा और आईएएस मुरुगन में ‘धांय .. धांय’

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एसआईआर जंग .. महुआ मोइत्रा और आईएएस मुरुगन में ‘धांय .. धांय’ बंदूकें तनी !

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कोलकाता। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और विशेष निर्वाचक सूची पर्यवेक्षक (एसईआरओ) आईएएस अधिकारी सी. एस. मुरुगन के बीच मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए माइक्रो-ऑब्ज़र्वर्स के कथित इस्तेमाल को लेकर विवाद छिड़ गया है. यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन माना जा रहा है.

सुभेन्दु मैती की रिपोर्ट के मुताबिक, बिना किसी का नाम लिए मुरुगन ने ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में लिखा, “मेरे पास उतनी बंदूकें नहीं हैं जितनी तस्वीर में दिखाई गई हैं. हालांकि, मुझे तमिलनाडु में पुलिस सेवा के दौरान साढ़े चार साल की ट्रेनिंग में विभिन्न प्रकार की बंदूकें चलाने का प्रशिक्षण मिला और मैंने उन्हें कानूनी और प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया.” यह पोस्ट टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर पलटवार माना जा रहा है.

 

 

मोइत्रा ने 18 फरवरी को एक्स पर लिखा था, “कृपया अपने रोल ऑब्ज़र्वर सी. मुरुगन आईएएस 2007, डिप्टी चेयरपर्सन टी बोर्ड को नियंत्रित करें, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हुए गुप्त व्हाट्सएप ग्रुप्स पर माइक्रो ऑब्ज़र्वर्स को गलत निर्देश जारी कर रहे हैं.”

महुआ मोइत्रा ने अपनी पोस्ट में ‘क्विक गन मुरुगन’ नामक लोकप्रिय सिनेमा किरदार की तस्वीर भी साझा की थी. यह पोस्ट उस समय लिखी गई थी, जब टीएमसी प्रतिनिधियों ने 18 फरवरी को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी.

इससे पहले टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए माइक्रो-ऑब्ज़र्वर्स का इस्तेमाल कर रहा है.

अभिषेक ने लगाया आरोप कि मुरुगन व्हाट्सएप के ज़रिए माइक्रो-ऑब्ज़र्वर्स को मतदाता सूची से नाम हटाने के निर्देश दे रहे थे और उन्होंने अपने ‘एक्स’ पेज पर उन संदेशों के स्क्रीनशॉट साझा किए. उनकी पोस्ट के अनुसार, “और भी चिंताजनक यह है कि विशेष रोल ऑब्ज़र्वर सी. मुरुगन ने जन्म प्रमाणपत्रों की स्वीकार्यता को लेकर सीधे माइक्रो-ऑब्ज़र्वर्स को व्हाट्सएप ग्रुप में निर्देश दिए, ताकि नाम हटाने की संख्या बढ़ाई जा सके. क्या मुझे चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश की याद दिलानी चाहिए कि माइक्रो-ऑब्ज़र्वर्स की भूमिका केवल सहायक की होनी चाहिए? फिर वैधानिक प्रक्रिया को क्यों दरकिनार किया जा रहा है और किसके निर्देश पर?”

 

 

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