मध्यप्रदेश की सबसे धनी नगरपालिका बदबूदार पानी से ग्रसित
अनूपपुर जिले की नगरपालिका परिषद बिजुरी, जिसे प्रदेश की सबसे धनी नगरपालिकाओं में गिना जाता है, आज गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है। यहां शुद्ध पानी की जगह नागरिकों को काला और बदबूदार पानी सप्लाई किया जा रहा है।
नगर के कई वार्डों में नलों से आ रहे दूषित पानी ने न सिर्फ आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है, बल्कि नगरपालिका की कार्यप्रणाली और दावों पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि पेयजल के नाम पर जो पानी दिया जा रहा है, वह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
पानी से पेट दर्द, उल्टी-दस्त, त्वचा रोग जैसे सिंप्टम्स झेल रहे हैं नगरवासी
स्थानीय नागरिकों के अनुसार पानी की स्थिति इतनी खराब है कि उसका उपयोग करने से पहले भी डर बना रहता है। कई परिवारों ने पेट दर्द, उल्टी-दस्त, त्वचा रोग और संक्रमण जैसी समस्याओं की शिकायत की है।
नागरिकों का कहना है कि वे नियमित रूप से टैक्स का भुगतान करते हैं, फिर भी उन्हें सुरक्षित पेयजल नहीं मिल पा रहा। लोगों का सवाल है कि जब नगरपालिका खुद को आर्थिक रूप से सक्षम बताती है, तो फिर बुनियादी सुविधा जैसे शुद्ध पानी की आपूर्ति में यह विफलता क्यों दिखाई दे रही है।
जैसा कहा गया था, उसके उलट बने हैं नगरपालिका के हालात
नगरपालिका परिषद बिजुरी द्वारा बहेराबांध क्षेत्र में जल शोधन के लिए फिल्टर प्लांट स्थापित किया गया था। उस समय दावा किया गया था कि इस प्लांट के शुरू होने से पूरे नगर को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके लिए पाइपलाइन और टैंकरों के माध्यम से जल आपूर्ति की व्यवस्था भी बनाई गई। हालांकि मौके पर देखी गई स्थिति इन दावों से मेल नहीं खाती।
जल स्रोतों और सप्लाई सिस्टम के आसपास गंदगी, जर्जर पाइपलाइन और रखरखाव की कमी साफ नजर आती है। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि जल शोधन प्रक्रिया तय मानकों के अनुसार नहीं चल रही।
पानी प्रभारी भी पानी के साफ होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है
इस पूरे मामले पर जब मौके पर मौजूद कर्मचारियों से सवाल किए गए, तो उन्होंने इतना जरूर कहा कि पानी को फिल्टर कर ही सप्लाई किया जाता है, लेकिन कैमरे के सामने आधिकारिक बयान देने से वे बचते नजर आए।
वहीं, पानी प्रभारी लखन साहू का कहना है कि फिल्टर प्लांट से शुद्धिकरण के बाद ही पानी नगर में भेजा जाता है। हालांकि नागरिकों का आरोप है कि अगर पानी सच में फिल्टर हो रहा होता, तो उसकी रंगत और बदबू ऐसी नहीं होती।
विधायक से लेकर पार्षदों तक दूषित पानी के खिलाफ
कोतमा के पूर्व विधायक सुनील सराफ ने नगरपालिका प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियां किसी भी समय बड़ा रूप ले सकती हैं। वहीं, नगरपालिका परिषद के वार्ड नंबर 10 के पार्षद जय कुमार और वार्ड नंबर 7 की पार्षद विमला पटेल ने भी अपने-अपने वार्डों में दूषित पानी की आपूर्ति की पुष्टि की है।
पार्षदों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
नगरवासियों ने प्रशासन के सामने रखीं अपनी मांगे
नगरवासियों ने मांग की है कि जल आपूर्ति की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए, फिल्टर प्लांट की नियमित मॉनिटरिंग हो और यदि लापरवाही पाई जाए तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह है कि क्या नगरपालिका परिषद बिजुरी और जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता देंगे, या फिर लोगों को मजबूरन इसी काले पानी से अपनी प्यास बुझानी पड़ेगी।
सवाल पॉलिटिक्स-वाला…
आखिर बिजुरी नगरपालिका में नलों से काला और बदबूदार पानी सप्लाई होने की असली वजह क्या है? फिल्टर प्लांट होने के बावजूद शुद्ध पेयजल क्यों नहीं मिल पा रहा है? क्या इंदौर के जैसी स्थिति यहाँ भी बन जाएगी तब सबका ध्यान इस तरफ जाएगा! दूषित पानी से होने वाली बीमारियों की जिम्मेदारी कौन लेगा? और सबसे बड़ा सवाल नगरपालिका और जिला प्रशासन इस संकट पर कब ठोस कार्रवाई करेगा?
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