सागर कलेक्टर पर ठेकेदार ने भुगतान रोकने और इसको लेकर आवाज उठाने पर लेकर झूठे केस में फ़साने का आरोप लगाया

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सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले में कलेक्टर संदीप जीआर पर लगे गंभीर आरोपों ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। स्मार्ट सिटी मिशन से जुड़े निर्माण कार्यों को लेकर एक ठेकेदार ने आरोप लगाया है कि न सिर्फ लगभग 10 करोड़ रुपये का भुगतान रोका गया, बल्कि कलेक्टर बंगले तक सड़क निर्माण जैसे कार्य भी कराए गए, जिनका अब तक भुगतान नहीं हुआ।

यह मामला उस वक्त सामने आया जब स्मार्ट सिटी मिशन से जुड़े ठेकेदार अजय सिंह लोधी ने एक ट्रस्ट के माध्यम से प्रशासन को शिकायत सौंपी। ठेकेदार का आरोप है कि इससे पहले अशोकनगर के कलेक्टर आदित्य सिंह पर भी इसी तरह के आरोप लग चुके हैं और अब सागर में भी वही स्थिति दोहराई जा रही है। इन आरोपों के सामने आने के बाद नौकरशाही में बेचैनी साफ देखी जा रही है।

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ठेकेदार अजय सिंह लोधी के अनुसार, उनकी फर्म द्वारा स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य कराए गए हैं। इनमें सड़क निर्माण, री-सरफेसिंग और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य शामिल हैं। उनका दावा है कि कार्यों की प्रगति लगभग 95 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी है, इसके बावजूद भुगतान जानबूझकर रोका जा रहा है।

शिकायत में बताया गया है कि अब तक केवल एक ही एमबी (मेज़रमेंट बुक) के तहत लगभग 247.81 लाख रुपये का आंशिक भुगतान किया गया है, जबकि 477.45 लाख रुपये अभी भी बकाया हैं। इसके अलावा पैकेज-2 से जुड़े करीब 605.42 लाख रुपये के कार्य पूरे होने के बावजूद उनका भुगतान पूरी तरह लंबित है। ठेकेदार का कहना है कि बिल विभाग में प्रस्तुत किए जा चुके हैं, लेकिन यह कहकर भुगतान रोका जा रहा है कि संबंधित कार्यों की मूल नस्ती विभाग में उपलब्ध नहीं है।

मामले को और गंभीर बनाते हुए ठेकेदार ने आरोप लगाया कि नवंबर 2024 में तत्कालीन निर्देशों के तहत कलेक्टर निवास परिसर में सीसी रोड का निर्माण कराया गया। इस कार्य पर करीब 20 लाख रुपये की लागत आई, लेकिन अब तक इसका भी भुगतान नहीं किया गया। ठेकेदार का कहना है कि भुगतान की मांग करने पर उन्हें दबाव, धमकी और झूठे मामलों में फंसाने की चेतावनी दी गई।

अजय सिंह लोधी का दावा है कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अब तक उनकी फर्म द्वारा करीब 10 करोड़ 82 लाख रुपये के निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसके बावजूद भुगतान को लेकर लगातार टालमटोल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास सभी कार्यों से जुड़े फोटोग्राफ, दस्तावेज़ और तकनीकी प्रमाण मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि काम तय मानकों के अनुसार और समय पर पूरा किया गया।

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह उठ रहा है कि अगर कार्य पूरे हो चुके हैं और उनके प्रमाण भी उपलब्ध हैं, तो भुगतान रोकने के पीछे वास्तविक कारण क्या है। विपक्ष इसे प्रशासनिक भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जोड़कर देख रहा है, जबकि प्रशासन की ओर से अब तक इस पर कोई स्पष्ट और आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, नगरीय प्रशासन विभाग और अन्य उच्च स्तरों तक पहुंचाई गई है। ठेकेदार का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो इससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी, बल्कि स्मार्ट सिटी जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर भी सवाल खड़े होंगे।

लेकिन जिस तरह से दस्तावेज़ी दावे, बकाया राशि और प्रशासनिक दबाव की बात सामने आ रही है, उसने सागर जिला प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि शासन और संबंधित विभाग इस पूरे प्रकरण की जांच किस दिशा में ले जाते हैं और सच्चाई सामने लाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं


 

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