ट्रम्प के विमान एयरफोर्स-1 में तकनीकी खराबी, बीच उड़ान से लौटना पड़ा!

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब उनका विमान Air Force One तकनीकी खराबी के कारण बीच उड़ान से वापस लौट आया। ट्रम्प स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित World Economic Forum में हिस्सा लेने जा रहे थे।

उस दौरान विमान में आई तकनीकी समस्या के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल सतर्कता बरतते हुए विमान को वापस अमेरिकी एयरबेस की ओर मोड़ दिया। हालांकि, ट्रम्प थोड़ी ही देर के बाद दूसरे प्लेन से दावोस के लिए रवाना हो गए।

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सूत्रों के मुताबिक, विमान के उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही कॉकपिट में तकनीकी अलर्ट मिला, जिसके बाद पायलटों ने तुरंत प्रोटोकॉल के तहत उच्च स्तरीय सुरक्षा अधिकारियों को सूचित किया। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि खराबी किस सिस्टम में आई थी, लेकिन एहतियात के तौर पर जोखिम न लेते हुए विमान को आगे की उड़ान के बजाय लौटाने का निर्णय लिया गया। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यात्रियों और विशेष रूप से ट्रम्प की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

एयरफोर्स-1 को दुनिया के सबसे सुरक्षित और अत्याधुनिक विमानों में गिना जाता है। इसमें मिसाइल डिफेंस सिस्टम, अत्याधुनिक संचार व्यवस्था और हर आपात स्थिति से निपटने के उपकरण मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद, किसी भी तकनीकी चेतावनी को हल्के में नहीं लिया जाता। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में विमान को वापस लौटाना एक मानक और जिम्मेदार कदम होता है।

इस घटना के बाद ट्रम्प के दावोस दौरे को लेकर भी असमंजस की स्थिति बन गई। दावोस इकोनॉमिक समिट में दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, उद्योगपति और नीति-निर्माता वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। ट्रम्प की उपस्थिति को इस सम्मेलन के लिए अहम माना जा रहा था, क्योंकि वे वैश्विक व्यापार, अमेरिका की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं।

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व्हाइट हाउस से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कोई सुरक्षा हमला नहीं बल्कि तकनीकी खराबी थी और इसमें किसी प्रकार की साजिश या बाहरी हस्तक्षेप के संकेत नहीं मिले हैं। विमान के लौटने के बाद इंजीनियरों की टीम ने उसकी गहन जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि ट्रम्प आगे की यात्रा किसी अन्य विमान से करेंगे या कार्यक्रम में बदलाव किया जाएगा।

इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि अत्याधुनिक तकनीक के बावजूद हवाई यात्रा में सतर्कता कितनी जरूरी है। साथ ही, यह भी स्पष्ट हुआ कि किसी भी वीआईपी मूवमेंट में सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाता, चाहे वह दुनिया का सबसे सुरक्षित विमान ही क्यों न हो


 

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