अब सुमित्रा ताई के चुनाव न लड़ने की घोषणा का इंतज़ार


इंदौर। केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज और उमा भारती ने राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी। दोनों अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। सुषमा और उमा दोनों ने इसके पीछे अपने स्वास्थ की बात कही। अब सबकी निगाहें भाजपा की तीसरी नेता के घोषणा पर लगी है। चर्चा यही है कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन क्या अगला चुनाव लड़ेंगी। इंदौर से आठ बार की सांसद सुमित्रा ताई के बारे में अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। बड़ा वर्ग उम्मीद लगाए बैठा है कि ताई अगला चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दे। इसके पीछे कुछ बड़े कारण बताये जा रहे हैं, पार्टी आलाकमान उन्हें उम्र के फॉर्मूले के आधार पर घर बैठने को कह सकता है।
कुछ लोगों का ये भी मानना है कि लोकसभा अध्यक्ष के पद पर रहने के बाद ताई को चुनावी राजनीति से खुद अलग हो जाना चाहिए। इंदौर में लगातार आठ बार सुमित्रा महाजन के सांसद रहने से पार्टी की नंबर दो की लाइन आगे बढ़ ही नहीं पाई। अगले चुनावों में पार्टी को ऐसी चुनौती का सामना भी करना पड़ सकता हैं। पिछले चुनावों में ताई की जीत का अंतर भी लगातार कम हुआ है, ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ताई को फिर मैदान में उतारा गया तो उनकी भी सत्यनारायण जटिया, लक्ष्मीनारायण पांडेय जैसी हार हो सकती है..
पार्टी को इस सीट पर अगले बीस सालों को देखते हुए कोई नया चेहरा लाना चाहिए. सबको इंतज़ार है, सुषमा, उमा के बाद सुमित्रा ताई के चुनाव न लड़ने की घोषणा का।
उमा भारती ने अपने ऐलान के साथ ये भी कहा कि ”राम मंदिर के लिए किसी आंदोलन की ज़रूरत नहीं है. माननीय अदालत ने कहा ये मामला आस्था का विवाद नहीं बल्कि ज़मीन का विवाद है. 2010 में फ़ैसला आ गया कि बीच का डोम राम लला का है. तो आंदोलन सफल हो गया, इस बात को साबित करने में कि राम जन्मभूमि है वह. इस मामले में सब पार्टियों को एक करने का प्रयास होना चाहिए. मुझे आगे भी कहेंगे तो मैं कोशिश करूंगी. राम मंदिर का मसला देश के सौहार्द के साथ जुड़ा है इसलिए जितनी जल्दी हो सके समाधान करना चाहिए.”


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