बेटे के चक्कर में खुद उलझते दिख रहे कैलाश
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बेटे के चक्कर में खुद उलझते दिख रहे कैलाश

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और इंदौर के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय इनदिनों उलझे हुए दिख रहे हैं। हारी हुई बाज़ी को जीतने वाले बाज़ीगर के रूप में उनकी पहचान है। अपने बेटे आकाश विजयवर्गीय के टिकट की बाज़ी भी कैलाश ने जीत ली। पर इसके लिए उन्हें अपनी टिकट कुर्बान करनी पड़ी। पार्टी का साफ़ कहना था कि एक परिवार में एक टिकट। लम्बे समय से प्रदेश की राजनीति से वनवास भोग रहे इस पूर्व मंत्री को भाजपा ने उनकी क़ुरबानी के बावजूद उन्हें सुरक्षित सीट नहीं दी। सूत्रों के अनुसार कैलाश ने बेटे के लिए इंदौर-२ या महू से टिकट मांगा था। पर पार्टी ने कांग्रेस का गढ़ रही इंदौर-3 से बेटे को टिकट दिया। इंदौर तीन की विधायक उषा ठाकुर को महू भेजा गया। मतदान के बाद उषा ने खुलकर कहा कि कैलाश ने उनका टिकट तीन नंबर से कटवाया। अपने बेटे के लिए कैलाश ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से गठजोड़ कर मेरे खिलाफ साजिश की।तीन नंबर मे भी मुकाबला कड़ा रहा। तीन बार के विधायक अश्विन जोशी ने आकाश को कड़ी टक्कर दी. कैलाश भी जान चूके हैं कि मुकाबला आसान नहीं रहा है। मतदान के बाद वे खामोश हैं। उस पर उषा ठाकुर और कुछ अन्य नेताओं पर कैलाश के खिलाफ खुलेआम बिगुल फूँक दिया है। अब यदि आकाश पराजित हो गए, तो कैलाश की राजनीति भी पराजित हो जायेगी। इंदौर में सुमित्रा महाजन, मालिनी गौड़, उषा ठाकुर, सुदर्शन गुप्ता जैसे नेता कैलाश को पसंद नहीं करते, और कैलाश भी उनको। इसमें अब अब एक और नाम जुड़ता दिख रहा है रमेश मेंदोला का। कैलाश के थिंक टैंक और करीबी मेंदोला भी उनसे दूरी बना सकते हैं। सत्ता की ताकत ही नेता का कद तय करती है, जब कैलाश विजयवर्गीय को मंत्री पद से हटाया गया उसके बाद उनके आस पास की भीड़ और रुतबा कम हो गया था. फिर महू जाने से वे इंदौर के मुद्दों पर भी बोलने का अधिकार खो चुके हैं, अब यदि आकाश हार गये तो और कैलाश खुद भी विधायक नहीं रह जायेगें, उस स्थिति में विजयर्गीय अकेले पड़ते दिख सकते हैं, इंदौर की पूरी भाजपा एक तरफ और कैलाश अकेले एक तरह रह जाएंगे. आकाश की जीत कैलाश का भविष्य तय करेगी.

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