इंदौर, केन्द्र सरकार की तरफ से एससी-एसटी एक्ट का विधेयक पारित किए जाने के खिलाफ महू में सामान्य और पिछडा जाती के लोगों ने विरोध का अनूठा तरीका इजाद किया है। महू में एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ सामान्य और पिछडा जाती के लोगों ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों के बाहर पोस्टर टांग दिए हैं।
इदौर से सटे महू कस्बे के बाजार और गलियों में इन दिनों घरों और दुकानों के बाहर एक पोस्टर देखा जा रहा है। फ्लेक्स पर तैयार किए गए इन पोस्टरों में लिखा गया है- “हमारा परिवार सामान्य वर्ग का परिवार है। हम एससी-एसटी संशोधन बिल का विरोध करते हैं।” दरअसल इन पोस्टर्स के जरिए हाल ही में पारित संशोधित एससी-एसटी बिल को लागू किए जाने का विरोध किया जा रहा है।दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया था, जिसमें इस एट्रोसिटी कानून के तहत प्राप्त शिकायतों की जांच के बाद प्रकरण दर्ज किया जाना था। केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को दरकिनार करते हुए संसद और राज्यसभा में इस बिल में संशोधन करते हुए इसे पारित कर दिया। संशोधन के बाद अब बगैर किसी जांच के सामान्य, पिछडा और अल्पसंख्यकों के खिलाफ सीधे केस दर्ज कर गैरजमानती गिरफ्तारी की जा सकेगी।
सपाक्स के मनोज पुरोहित ने बताया कि केन्द्र सरकार का यह बिल काला कानून है। यह समाज को बांटे जाने वाला साबित होगा। निर्दोष लोगों को अपने स्वार्थ के लिए झूठा फंसाया जाएगा। जिन सामान्य, पिछडा और अल्पसंख्यक जनप्रतिनिधियों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए वोट देकर संसद में भेजा था उन्होंने ही 22 फीसदी एससी-एसटी वर्ग को खुश करने के लिए यह कानून पारित किया है।
एससी-एसटी एक्ट संशोधन के बाद 17 अगस्त को केन्द्र सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना के खिलाफ सपाक्स के राष्ट्रीय सरंक्षक पूर्व आईएएस हीरालाल त्रिवेदी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की है।
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