मोदी सन्देश के खतरे … मास्क, हाथ धोने का कहने नहीं आये थे, बीमारी महामारी में बदलने वाली है ये समझ लीजिये


क्या आपको पता है मोदी जी अचानक राष्ट्र के नाम सन्देश देने क्यो आए थे?? औऱ वो पुरानी घिसी पीटी बातों को क्यों दोहरा रहे थे अगर नही पता तो इस पोस्ट को पूरा पढिये…

अपूर्व भारद्वाज ( #डाटावाणी )

मैं शुरू से कह रहा हूँ कि किसी देश मे एक बीमारी को महामारी तब तक नही बोला जाता जब तक कि वो कुल जनसँख्या के 60-70 फीसदी लोगो को संक्रमित नही कर ले, एशियन फ्लू के समय भी यही हुआ था

अब सरकार की पैनल रिपोर्ट ने मेरे दावे की पुष्टि कर दी है रिपोर्ट के अनुसार अभी तक 30 फीसदी भारतीयों को यह रोग हो चुका है औऱ फरवरी तक भारत के आधे से ज्यादा लोगों को यह रोग हो चुका होगा

सिरों सर्वे का सेम्पल साइज कम होने के कारण डाटा विज्ञान उस पर कम भरोसा करता है लेकिन एक नया डेटा मॉडल इस बात की पुष्टि करता है जिसके अनुसार जितने केस रिपोर्ट नही हुए वो भी बहुत महत्वपूर्ण है और भारत मे यह संख्या सर्वाधिक है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश भी हमसे बेहतर हैं

अमेरिका औऱ ब्राजील इस मामले में हम से बहुत पीछे है हमारे पड़ोसी देशो में मृत्यु दर भारत से कई गुना कम है इस तरह हम मान सकते है कि हम कम से कम कोरोना के मामले में तो टॉप पर पहुँच ही चुके है

अब त्योहारों और ठंड का सीजन शुरू होने पर मामले तेजी से बढ़ सकते है अगर सरकार और लोगो द्वारा ऐसी ही लापरवाही बरती जाएगी तो एक महीने में 26 लाख तक लोग संक्रमित हो सकते हैं।

सरकार ने इस बीमारी की रोकथाम में बहुत कोताही बरती है। बंगलादेश और पाकिस्तान जैसे गरीब देशो ने भारत से कई गुना अच्छा काम किया है। कल साहब ने राष्ट्र के नाम संदेश देकर ने अपने हाथ इन सब से पीछे खींच लिए है लेकिन आप अपने हाथ आगे बढ़ाकर धोते रहिये और मास्क लगाते रहिये…सावधानी ही सुरक्षा है

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