सत्ता संतुलन…विजयवर्गीय की दो टूक, इंदौर महापौर में ‘प्रयोग’ नहीं चलेगा

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चुनाव प्रबन्धन समिति में राष्ट्रीय महासचिव की दो टूक, बोले- इंदौर को अनुभवी और विजनरी नेतृत्व की जरुरत जो दिल्ली तक बात रख सके

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इंदौर। इंदौर महापौर के मामले में अब कैलाश विजयवर्गीय भी मुखर हो गए हैं। अब तक खामोश बैठे राष्ट्रीय महासचिव ने संगठन और सत्त्ता को साफ़ शब्दों में बता दिया कि इंदौर जैसे शहर में महापौर के चयन में प्रयोग नहीं किया जा सकता।

उन्होंने संकेत दिए कि प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित और भाजपा के लिए मायने रखने वाली इस सीट को प्रयोगशाला बनाकर छोड़ा नहीं जा सकता। उन्होने कहा कि यहाँ एक अनुभवी और मजबूत नेता की जरुरत है ,जो दिल्ली से लेकर भोपाल तक अपनी बात रख सके।

इस चर्चा के बाद संघ के सुझाये तमाम नाम फ़िलहाल पीछे जाते दिख रहे हैं, एक बार फिर रमेश मेंदोला की दावेदारी मजबूत हुई है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ओर इंदौर से 5 बार विधायक व एक बार महापौर रहे कैलाश विजयवर्गीय नगरीय निकाय चुनाव में पहली बार मुखर हुए।

मुखरता के उनके ये स्वर पार्टी की उस अहम बैठक में गूंजे जो एक दिन पहले भोपाल में प्रदेश में महापौर प्रत्याशी के चयन पर चिंतन मन्थन करने बैठी थी।

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हालांकि इस बैठक में विजयवर्गीय प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित नही हुए। वे वर्चुअल रूप से ऑनलाइन इस बैठक में शामिल थे। वरिष्ठ नेताओं के बीच जब उनसे भी राय मांगी गई तो उन्होंने बगेर किसी लागलपेट के स्पष्ट किया कि इंदौर जैसे नगर निगम में महापौर जैसे पद पर प्रयोग करने से बचना चाहिए।

विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर प्रदेश की सबसे बड़ी नगर निगम है और रेवेन्यू के हिसाब से राज्य का एक अहम शहर है। ऐसे में यहां ऐसा उम्मीदवार चयन करें जो दिल्ली भोपाल के बीच बेहतर समन्वय सेन केवल काम करे बल्कि अपने विजनरी डिसीजन से केंद्र राज्य से शहर के लिए बड़ा फंड बड़ी योजनाए ला सके।

गौरतलब है कि प्रदेश संगठन और पार्टी इस बार किसी नए चेहरे पर दांव लगाने का मन बनाकर काम कर रही है। जो नाम चर्चाओं में सामने है...विजयवर्गीय के इस मंतव्य के बाद वे पीछे छूटते नजर आ रहे है ओर महापौर पद के स्वाभाविक दावेदार विधायक रमेश मेंदोला आगे है।


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