‘खिचड़ी सरकार’ में से सिंधिया के चावल फेंकने की तैयारी !

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शिवराज की ‘खिचड़ी’ का स्वाद चावल ने बिगाड़ा !

भाजपा की प्रदेश सरकार पशुओं के खाने योग्य चावल गरीबों में बांटकर उलझ गई है,कांग्रेस से भाजपा में आये खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री बिसाहूलाल साहू पर गाज गिराकर शिवराज खुद को बचाने की कोशिश में  है।

दर्शक

इंदौर। मध्यप्रदेश में शिवराज की खिचड़ी सरकार का स्वाद चावल ने बिगाड़ दिया है। प्रदेश के तीन जिलों में गरीबों को पशुओं वाला अनाज बांटने के मामले की जांच चल रही है। प्रदेश में 15 साल जमे राजनीति के पुराने चावल शिवराज इस बार संकट में आ गए।

प्रदेश में घटिया अनाज बांटने की शिकायत पहले भी होती रही पर इस बार मामला बड़ी जांच तक पहुंचा। जांच कमेटी की रिपोर्ट इस समय चर्चा में है। इस रिपोर्ट में ये बताया गया है कि ये चावल तीन साल से बोरियों में बंद है। इसे फिर से गोदाम में लाकर गरीबों को बांटा गया है। करीब 6200 परिवारों को पशुओं के खाने लायक अनाज मध्यप्रदेश के दो जिलों में बांटने का मामला सामने आया है।

इस पर देश भर में आवाज़ उठने के बाद सरकार ने इसकी जांच करवाने की घोषणा की है। इस रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के कई और जिलों में ऐसा ही अनाज बांटे जाने का मामले सामने आ सकते है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा ने जिस तरह से कांग्रेस के विधायकों के साथ मिलकर सरकार बनाई है। वो बेहद नुकसान वाली साबित होगी। प्रदेश के चावल की तरह इस खिचड़ी का भी चावल ख़राब हो गया है। शिवराज और सिंधिया गुट के बीच भाजपा के भीतर जो खेल चल रहा है, उसमे भाजपा को जनता की तरह ध्यान देने की फुर्सत ही नहीं।

कोरोना के संक्रमण काल में बड़े स्तर पर ऐसे सड़े अनाज को रीसायकल करके गरीब जनता को बांटने के मामले सामने आ सकता है। कांग्रेस ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि इसका पूरा ठीकरा जरुरत पढ़ने पर भाजपा कांग्रेस से आये बिसाहूलाल साहू पर फोड़ने की तैयारी कर रही है।

साहू इस सरकार में खाद्य और आपूर्ति मंत्री है। इसके अलावा भाजपा का एक धड़ा इसे कमलनाथ सरकार के मंत्री के समय का घोटाला बताने पर तुला है। इसमें भी गाज सिंधिया के करीबी प्रधुम्न सिंह तोमर पर गिराने की कोशिश है। कांग्रेस के शासन में खाद्य और आपूर्ति विभाग के मंत्रालय को तोमर ही देख रहे थे।

इधर कांग्रेस के प्रवक्ता भूपेश गुप्ता ने आरोप लगाया कि 2016 में रतलाम और मंदसौर जिले में घटिया चावल बांटने की शिकायत हुई थी। तत्कालीन शिवराज सरकार ने जांच करने के बजाय घोटाले बाजों को आशीर्वाद दिया।

2017 में मक्सी और उज्जैन जिले में सड़े चावल की सप्लाई की शिकायतें हुई लेकिन घोषणा होने के बाद भी जांच नहीं की गई। 2020 में भी अप्रैल महीने शिवपुरी, भोपाल, सागर और भिंड में शिकायतें ठंडे बस्ते में दबा दी गई।

Realated stories…. 

https://politicswala.com/2020/09/03/shivraj-sakaar-madhyaprdesh-cattlefeed-anaz/

 

 

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