थोड़ा संभल जाएं, रामकृपा बनी रहेगी
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थोड़ा संभल जाएं, रामकृपा बनी रहेगी

अयोध्या में मंदिर का भूमिपूजन हुआ, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के पदचिन्हों पर चलने की कसमें खाई गई, जयकारे लगे, दूसरी तरफ देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है, हम शराब दुकानें खोलकर राजस्व वसूली और जश्न में डूबे हैं, क्या यही है राम की सीख, जनता के प्रति जिम्मेदारी की मर्यादा

 

पंकज मुकाती (राजनीतिक विश्लेषक )

अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन हो गया। प्रधानमंत्री और करीब पौने दो सौ विशिष्ट जन इसमें शामिल हुए। एक दिन पहले पूरे अयोध्या में दीपोत्सव मनाया गया। सरयू के घाट की छटा निराली थी, एक अलौकिक और अद्भुत संसार रचा गया। आम आदमी में मर्यादा पुरुषोत्तम की छवि उभरी।

कुछ पलों के लिए हर हिन्दुस्तानी भावुक होकर उस दौर में डूब सा गया। आखिर तीस साल पहले के राम आंदोलन, बाबरी ध्वंस और इन सबके बीच देश ने देखे साम्प्रदायिक दंगे। इतना कुछ घटा कि आज सुकून सा महसूस हुआ। राम राज्य के साथ कुछ दिन पहले हमने अपनी युद्ध ताकत भी बढ़ा ली। सामरिक महत्व का सबसे जरुरी लड़ाकू विमान राफेल हमारे बेड़े में शामिल हुआ।

यानी युद्ध और धर्म और धर्मयुद्ध तीनों के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं। ये भी संयोग है कि आज ही देश धारा 370 से कश्मीर के मुक्त होने की वर्षगांठ भी मना रहा है। इस शुभ घड़ी में सरकार और आम आदमी को कोरोना संक्रमण से निपटने की भी शपथ राम का नाम लेकर ले लेनी चाहिए।

मर्यादा पुरुषोत्तम से मर्यादा में रहने की सीख तो हम ले ही सकते हैं। आत्मरक्षा सबसे बड़ा संकल्प है। कोरोना काल में हर व्यक्ति को अपनी आत्मरक्षा की फ़िक्र रखनी चाहिए। हम संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे तो परिवार समाज और देश सब सुरक्षित रहेगा। सरकारें और प्रशासन कितनी ही सख्ती कर लें, गाइडलाइन जारी कर दे, वो काम नहीं आने वाली।

आपकी अपनी मर्यादित जीवन शैली ही आपको बचाएगी। सरकारें और उनके मुखिया खुद संक्रमण से नहीं बच सके ऐसे में आप खुद समझ लीजिये आपकी चूक कहाँ ले जायेगी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के अलावा मध्यप्रदेश के चार मंत्री भी संक्रमित हो गए हैं। उत्तर प्रदेश में एक मंत्री की मौत हो गई। देश के गृह मंत्री अमित शाह खुद संक्रमण का शिकार हो गए हैं।

महानायक अमिताभ बच्चन अपने पूरे परिवार सहित संक्रमित हो गए। इन सबसे सबक लीजिये। इस दौर में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह जैसे लोग भी हैं जो राजनेताओं के संक्रमित होने को अयोध्या में भूमि पूजन गलत मुहूर्त में होने का फल बता रहे हैं। ये बेहद बचकाना है, आखिर सात लाख लोग कौन सा फल भोग रहे हैं। इस तरह की राजनीति से भी बचिए, देश हित में खुद को संयमित रखिये।

देश में कोरोना का दूसरा दौर बस आ ही गया है। इसके आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार मत करिये। लोग ये मानकर चल रहे हैं कि पहले दौर में जब कुछ नहीं हुआ तो अब क्या होगा ? वे ये भी समझ रहे हैं कि पहला दौर खतरनाक था, दूसरा तो वैसे भी कमजोर होगा।

दुनिया की तरफ एक बार देख लीजिये। जापान जैसे देश के बारे में कहा गया कि वहां के लोगों ने लंबे समय तक साफ-सफाई की सावधानी बरती, संक्रमण से बचने की कोशिश की, लेकिन आखिर में जाकर लोग सफाई की सावधानी से थक गए, और लापरवाह हो गए।

अब कुछ वैसी ही खबर हांगकांग से आ रही है, जो कि उससे बढ़कर है। हांगकांग में अभी ऐसी आशंका है कि वहां कोरोना का तीसरा दौर आ सकता है। हिन्दुस्तान में प्रतिबंधों को लागू करने या छूट देने पर अमल का जिम्मा और अधिकार राज्यों का है। इसलिए यहां के राज्यों को यह समझना चाहिए कि कैसे खतरों को घटाया जा सकता है।

ब्रिटेन की दूसरे दौर की आशंका को देखते हुए पूरे देश में लॉकडाऊन की तैयारी कर रहा है। इस लॉकडाउन में 50 बरस से अधिक उम्र के लोगों को घरों में रखा जाएगा।

हिंदुस्तान में सरकार को शराब बिक्री से बढ़े संक्रमण पर भी ध्यान देना चाहिए। शराबबंदी के अलावा जो भी राज्य हैं, उन्होंने लॉकडाउन में भी शराब दुकानें खोलने की अनुमति दे दी।

अब वे एक शराबी से उम्मीद कर रहे हैं कि वो सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, हाथ धोने जैसे तमाम उपायों का पालन करे। आखिर ऐसे क्या जल्दी है शराबखाने खोलने की? एक सर्वे के मुताबिक शराबबंदी के चलते लोगों की मौत का कोई बड़ा नंबर नहीं है, उससे कई गुना बड़ा नंबर है, शराब दुकानों की भीड़ से बढ़े संक्रमण का।
क्यों न कुछ दिन के लिए ही सही शराब की बिक्री भी बंद कर दें। शायद इससे रामराज्य की तरफ एक कदम बढ़ सके।

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