लखनऊ। उत्तरप्रदेश के बाद मध्यप्रदेश में भी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी लोकसभा चुनाव साथ लड़ेंगे। इस नए गठबंधन से कांग्रेस को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। सबसे बड़ी बात ये है कि मध्यप्रदेश में बहुजन समाजवादी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने कमलनाथ सरकार को समर्थन दिया हुआ है। बसपा ने विधानसभा में दो और सपा ने एक सीट जीती है। . उत्तरप्रदेश के बाद सपा और बसपा ने पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश और उत्तराखंड में भी गठबंधन कर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इस नए गठबंधन से राहुल गांधी के नेतृत्व में महागठबंधन खतरे में दिख रहा है। जिस तरह से समाजवादी पार्टी और बसपा ने मध्यप्रदेश में हाथ मिलाया है। उससे एक मैसेज ये जा रहा है कि माया और अखिलेश कही बीजेपी की बी टीम तो नहीं बन गए। एक तरह से वे मध्यप्रदेश में बीजेपी को ही फायदा पहुंचाएंगे। जो भी वोट बसपा और सपा के खाते में जाएंगे वो सीधे-सीधे कांग्रेस को नुकसान पंहुंचायेंगे।
मध्यप्रदेश में सपा तीन सीटों पर और बसपा 26 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी। वहीं, उत्तराखंड में सपा के खाते में एक सीट आई है। जबकि चार सीट पर बसपा अपने प्रत्याशी उतारेगी। दोनों ही दलों ने इन राज्यों में लोकसभा चुनाव के लिए बनने वाले गठबंधन में कांग्रेस को दूर रखा है।मध्यप्रदेश में बालाघाट, टीकमगढ़ और खुजराहो लोकसभा सीट से सपा के प्रत्याशी मैदान में रहेंगे। वहीं, उत्तराखंड में पौड़ी (गढ़वाल) सपा के खाते में आई है। उत्तरप्रदेश में सपा-बसपा 35-38 सीटों पर गठबंधन कर लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इस गठबंधन में कांग्रेस को जगह नहीं दी गई है। हालांकि, अमेठी और रायबरेली की सीट पर गठबंधन अपना कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं करेगा।
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