बेटे के मोह में चुनाव हारे कांतिलाल फिर टिकट की उम्मीद से !


 

– सांसद जीएस डामोर ने झाबुआ की विधायकी छोड़ी, इस्तीफे से बदलेंगे विधानसभा के समीकरण

झाबुआ। झाबुआ-रतलाम लोकसभा सीट से चुनाव जीते बीजेपी के जीएस डामोर को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने एलान किया है कि डामोर सांसद बने रहेंगे और विधायक पद छोड़ेंगे। उनके इस एलान के साथ ही मंगलवार को की झाबुआ विधानसभा सीट से जीएस डामोर ने इस्तीफा दे दिया है। अब यहां विधानसभा का उप चुनाव होना तय हो गया है। डामोर पूर्व मंत्री कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत को विधानसभा चुनाव में हराकर विधायक बने थे। इसके बाद झाबुआ-रतलाम लोकसभा सीट पर उन्होंने कांतिलाल भूरिया को भी हराया। पिता-पुत्र दोनों को हराकर डामोर ने इलाके की राजनीति के समीकरण बदल दिए। डामोर के इस्तीफे के बाद भूरिया एक बार फिर अपने बेटे के टिकट के लिए सक्रिय हो गए है. डामोर के विधायकी छोड़ने , के फैसले के बाद कांग्रेस ने राहत भरी सांस ली है। इसकी वजह ये है कि 230 सदस्यों वाली विधानसभा में डामोर के इस्तीफे के बाद 229 सदस्य बचेंगे। इसमें स्पष्ट बहुमत के लिए 115 सदस्य कांग्रेस सरकार के पास हैं। कांग्रेस के लिए यह राहत तब तक बनी रहेगी, जब तक उपचुनाव नहीं हो जाता। ऐसे हालात में कांग्रेस सरकार को बाहर से किसी के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह 115 विधायकों के साथ बहुमत में होगी।

दरअसल, 230 सीट वाली विधानसभा में भाजपा के 109, जबकि कांग्रेस के 114 विधायक हैं। फिलहाल 4 निर्दलीय, 2 बसपा व 1 सपा विधायक के समर्थन से 121 विधायक को साथ लेकर कांग्रेस ने सरकार बना रखी है। ऐसे में डामोर के विधायक पद से इस्तीफा देने पर भाजपा की सीट एक और कम होकर 108 ही रह जाएंगी और विधानसभा के समीकरण भी बदल जाएंगे। इसके बाद विधानसभा में केवल 229 सदस्य बचेंगे। इस हिसाब से कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है। ऐसे हालात में कांग्रेस सरकार को बाहर से किसी के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह 115 विधायकों के साथ बहुमत में होगी और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार सुरक्षित बची रहेगी। हालांकि यह राहत तब तक रहेगी, जब तक उपचुनाव नहीं हो जाते। ऐसे में भाजपा नेताओं के उस दावे को झटका लगा है, जिनमें वे कांग्रेस सरकार को अल्पमत में होने का आरोप लगाते आ रहे थे। इसके अलावा उपचुनाव होने पर अगर कांग्रेस इस पर चुनाव जीतती है तो कांग्रेस के पास 116 विधायक हो जाएंगें, जो कि स्पष्ट बहुमत के लिए पर्याप्त हैं। यानी डामोर के विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद झाबुआ विधानसभा का उपचुनाव कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम कर सकता है।

जिला भाजपा अध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा ने जानकारी देते हुये बताया कि नवनिर्वाचित सांसद जीएस डामोर द्वारा कार्यकर्ताओं एवं जनभावनाओं को महत्व देते हुए मंगलवार को प्रदेश भाजपा संगठन से परामर्श उपरांत झाबुआ विधायक के पद से अपना त्यागपत्र दे दिया है। वे अब झाबुआ-रतलाम-आलिराजपुर संसदीय क्षेत्र का सांसद के रूप में प्रतिनिधित्व करेंगे। तीनों जिलों के भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने श्री डामोर के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा है कि अब पूरे संसदीय क्षेत्र के समग्र विकास में उनकी सकारात्मक भूमिका के चलते तेजी से विकास कार्यों को साकारता प्राप्त होगी।


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