राजनीति के कस्मे, वादे… वादा -नेताओं के बेटों को टिकट नहीं, हकीकत-अपनों को टिकट देने का सिलसिला पुराना
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राजनीति के कस्मे, वादे… वादा -नेताओं के बेटों को टिकट नहीं, हकीकत-अपनों को टिकट देने का सिलसिला पुराना

 

कई सालों से भाजपा में एक व्यक्ति, एक पद की नीति है, नियम को तोड़कर मालिनी गौड़ को विधायक रहते महापौर का
टिकट भी दिया गया था वो भी दो बार। संभव है विधायक रमेश मेंदोला महापौर का टिकट हासिल कर लें।

इंदौर। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा बुधवार को भोपाल आये। नड्डा ने प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में हिस्सा लिया। कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने कार्यकर्ताओं को खुश करने की कोशिश की।

सभी कार्यकर्ताओं को सन्देश दिया कि इस बार नेता के बेटे-बेटियों, पत्नी को टिकट नहीं देंगे। टिकट कार्यकर्ताओं
को ही मिलेगा (पिछले बार भी चुनाव के पहले भाजपा ने ऐसा ही वादा किया था।

अध्यक्ष ने विधायकों और सांसदों को दो टूक सन्देश दिया कि पार्टी को जिताओ, इस बार बेटे-बेटियों और परिवार वालों को टिकट नहीं मिलेगा। यदि आपके इलाके से महापौर, अध्यक्ष नहीं जीते तो आपको भी मंच पर जगह नहीं मिलेगी। कार्यकर्ता उत्साहित हैं, पर उन्हें पता है अंत में टिकट उनतक पहुंचना बेहद मुश्किल ही होगा।

इंदौर शहर में भी पुराने अनुभव ये कहते हैं कि ऐसी नीति कई वर्षों से है, फिर भी कुनबे बरसों से संगठन और सत्ता में सिलसिलेवार चुने जा रहे हैं। किसी-किसी की तो तीसरी पीढ़ी पार्षद की दावेदारी में है।

इंदौर के विधानसभा तीन से भाजपा के विधायक आकाश विजयवर्गीय के अगले टिकट पर भी इस नीति के तहत संकट खड़ा होता दिख रहा है। आकाश राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं। आकाश को पिछली बार भी बड़ी मशक्कत के बाद टिकट मिला था। 

दूसरे बड़ा नाम एकलव्य गौड़ का है। इंदौर की महापौर रही मालिनी गौड़ अपने बेटे के टिकट के लिए प्रयासरत है। नई नीति गौड़ परिवार को निराश कर सकती हैं। खुद मालिनी गौड़ लगातार दस साल तक इंदौर की महापौर रही और विधायक भी परिवारवाद के साथ साथ ये एक व्यक्ति, एक पद का भी उल्लंघन है।

पिछले कई सालों से भाजपा में एक व्यक्ति, एक पद की नीति रही है, बावजूद इसके इस नियम को तोड़कर मालिनी गौड़ को विधायक रहते महापौर का टिकट भी दिया गया था वो भी दो बार। इस बार भी बहुत संभव है ये नियम तोड़कर विधायक रमेश मेंदोला महापौर का टिकट हासिल कर लें।

मंत्री तुलसी सिलावट अपने बेटे नीतीश के लिए जगह बनाने में जुटे हुए है। सांवेर के कई राजनीतिक आयोजनों में उनकी उपस्थिति देखी जा सकती है।

इसके अलावा विधायक रमेश मेंदोला अपने भतीजे के लिए कोशिश कर रहे है। लम्बे समय से पार्षद चंदू शिंदे, मुंन्नालाल यादव भी अपने परिवार के लिए टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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