दिग्विजय के मौन को पत्‍नी अमृता ने अभिव्‍यक्‍त किया


पंकज शुक्‍ला,
192 दिन चली नर्मदा यात्रा को गैर राजनीतिक बनाए रखने के लिए पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जिस ‘मौन’ को धारण कर रखा था उसे यात्रा के समापन अवसर पर उनकी पत्‍नी अमृता राय ने अभिव्‍यक्‍त किया। नरसिंहपुर जिले के बरमान घाट पर यात्रा के समापन कार्यक्रम में संतों और कांग्रेस नेताओं-कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में अमृता राय ने भावुक स्‍वर में कहा कि इस यात्रा के दौरान वे अपने पति के कर्मक्षेत्र को और मप्र को लेकर दिग्विजय‍ सिंह की चिंताओं को जान पाईं। नर्मदा यात्रा के अपने पुण्‍य को समाज को समर्पित करते हुए अमृता ने कहा कि हमने यात्रा में नर्मदा के कई रूपों को देखा मगर उसका जगह-जगह गड्ढों में तब्‍दील हो जाना, उसकी धारा का टूट जाना, भीतर तक कष्‍ट पहुंचा गया। यदि मैंने सच्‍ची भक्ति की होगी तो मां नर्मदा मुझे शक्ति दें कि मैं उसे सदा नीरा बनाए रखने के लिए भविष्‍य में कुछ कर सकूं।
वर्ष 1993 से वर्ष 2003 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह ने 70 वर्ष की उम्र में अपनी पत्नी अमृता राय के साथ पिछले साल 30 सितंबर को नर्मदा पूजन के बाद यह नर्मदा परिक्रमा पदयात्रा शुरू की थी। तब उन्‍होंने साफ किया था कि यह यात्रा पूरी तरह गैर राजनीतिक रहेगी। उन्‍होंने इस संकल्‍प का पालन भी किया। पूरी यात्रा के दौरान वे राजनीतिक बयानों और क्रियाकलापों से दूर रहे। समापन के अवसर पर भी कार्यक्रम में मौजूद नेताओं ने उनके संकल्‍प की प्रशंसा की। यात्रा के अनुभव सुनाने तथा अपना आभार व्‍यक्‍त करने के दौरान अमृता राय भावुक हो उठीं। उन्‍होंने कहा कि वे मां से बिछड़ने का अनुभव कर रही हैं। यह सौभाग्‍य है कि अपने पति के संकल्‍प को पूरा करने में सहभागी बन सकी। इस यात्रा के दौरान पति के कर्मक्षेत्र को जाना तथा यहां के प्रति उनकी चिंताओं को समझा है। यूं तो यह यात्रा धार्मिक थी लेकिन इस दौरान हुए सामाजिक अनुभव जीवन भर याद रहेंगे। नर्मदा को कल-कल बहते देखना और उसके धीर गंभीर रूप को निहारना जितना सुखद था उतना ही कष्‍टकारी अनुभव उसे जलविहीन देखना भी था। इस टीस को स्‍पष्‍ट करते हुए अमृता ने कहा कि इस यात्रा का सुफल तब होगा जब वे नर्मदा की धारा को अविरल बनाए रखने में कुछ योगदान दे सकेंगी। उन्‍होंने मार्ग में लोगों से मिले स्‍नेह को भी भावुकता से याद किया।
इससे पूर्व दिग्विजय, अमृता और पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा, नारायण सिंह अमलावे सहित उनके कई समर्थक नर्मदा नदी के दोनों किनारे करीब 3,300 किलोमीटर की इस पदयात्रा के बाद सोमवार सुबह बरमान घाट पर पहुंचे। घाट पर पहुंचने के बाद दिग्विजय और उनकी पत्नी ने यात्रा पूरी होने से जुड़े कई धार्मिक कर्मकांड किए। समापन कार्यक्रम में आशीर्वाद देने जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंदजी और आध्यात्मिक संत देवप्रभाकर शास्‍त्री ‘दद्दाजी’ पहुंचे।

मुझे यकीन नहीं था कि यात्रा कर पाएंगे : कमलनाथ
इस दौरान इस धार्मिक यात्रा को पूरी करने के लिए दिग्विजय को शुभकामनाएं देने के लिए पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ, सुरेश पचौरी, कांतिलाल भूरिया, सांसद विवेक तन्‍खा, प्रदेश प्रभारी महासचिव दीपक बावरिया, मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव सहित कई अन्य पार्टी नेता पहुंचे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कमलनाथ ने कहा कि उनके दिग्विजय सिंह से बरसों पुराने संबंध हैं। लेकिन इस बार सिंह को जानने में उन्‍होंने चूक कर दी। जब‍ सिंह ने नर्मदा यात्रा का संकल्‍प जताया था तब लगा था कि वे यात्रा नहीं कर पाएंगे, लेकिन सिंह ने युवाओं को भी अंचभे में डालते हुए 70 वर्ष की आयु में 3 हजार किमी की यात्रा की। यह प्रदेश में हुए गिनेचुने आश्‍चर्यों में से एक है।
पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने कहा कि दिग्विजय सिंह ने एक कठिन संकल्‍प को पूरा किया है। यात्रा के आरंभ के समय ही सभी इस चिंता में थे कि यह संकल्‍प पूर्ण कैसे होगा लेकिन सिंह ने तप से यह कर दिखाया। पूर्व मंत्री सांसद कांतिलाल भूरिया, सांसद तन्‍खा, प्रदेश अध्‍यक्ष यादव, राष्‍ट्रीय महासचिव बावरिया, परिक्रमा में साथ रहे कांग्रेस नेता रामेश्‍वर नीखरा सहित सभी नेताओं और अभिनेता आशुतोष राणा ने सिंह की यात्रा की तुलना योगियों के तप से की।
अपनी बात बाद में करूंगा : दिग्विजय सिंह
यात्रा में सहयोग के प्रति आभार व्‍यक्‍त करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि गुरु के आशीर्वाद से 20 साल पुराना संकल्‍प पूरा हुआ है। उन सभी के प्रति आभार जिन्‍होंने परिक्रमा में साथ दिया। सभी का नाम लेना संभव नहीं है, मैं फेसबुक पर सभी के नाम लूंगा। समय का अभाव है इसलिए अपनी बात हम बाद में करेंगे। अपने गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंदजी के प्रति श्रद्धा व्‍यक्‍त करते हुए सिंह ने कहा कि गुरु के चरणों में बैठ कर मैं यहां तक पहुंचा हूं। हमारे पुण्‍य और आयु गुरु को मिले और आप सैंकडों वर्षों तक सनातन धर्म को सही दिशा दे सकें क्‍योंकि आज आप एकमात्र ऐसे शंकराचार्य और धर्मगुरु है जिन्‍होंने देश में धर्म को सही रूप में परिभाषित किया है।

 


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