डेली कॉलेज गवर्निंग बॉडी के लिए राजा के भाई की चलेगी, सुमेरसिंह, बाकलीवाल को 24 घंटे में हटना पड़ा


BHOPAL। मध्यप्रदेश की सरकार के बारे में कहा जा रहा है-कमलनाथ के भेष में ये दिग्विजय की सरकार है। हर फैसले में दिग्विजय के हस्तक्षेप से ये साफ़ दिख भी रहा है। मंत्रियों, मंत्रिमंडल के अलावा दूसरे छोटे मामलों में भी दिग्विजय का ही जोर दिख रहा है। डेली कॉलेज के गवर्निंग बॉडी में कमलनाथ को अपने दून स्कूल के दोस्त सुमेरसिंह की नियुक्ति 24 घंटे में ही रद्द करनी पड़ी। क्यों ? क्योंकि दिग्विजयसिंह के भाई लक्ष्मण सिंह डेली कॉलेज में अपने दो करीबियों को शामिल करवाना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार लक्ष्मण सिंह ने दिग्विजय सिंह के जरिये चार नाम कमलनाथ तक पहुंचा दिया हो।

मंगलवार को पूर्व प्राचार्य सुमेर सिंह और इंदौर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष विनय बाकलीवाल की नियुक्ति को रद्द करने का आदेश आ गया। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ को दून स्कूल के दोस्त सुमेर सिंह के साथ ही एक और राजनीतिक दोस्ती निभाने को ये फैसला करना पड़ा। चाचौड़ा के कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह उर्फ (छोटे राजा) की पसंद के लोगों को बोर्ड में शामिल करने का वादा कमलनाथ अपने साथी दिग्विजयसिंह से पहले ही कर चुके थे।

लक्ष्मण सिंह डेली कॉलेज के छात्र रह चुके हैं और अपने बड़े भाई दिग्विजय सिंह के सामने कॉलेज के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में शामिल होने की मंशा जाहिर कर चुके हैं। दिग्विजय सिंह डेली कॉलेज के पूर्व छात्र एवं संरक्षक हैं। लक्ष्मण सिंह चार बार सांसद रह चुके हैं। इसके अलावा पूर्व में दो बार विधानसभा सदस्य रह चुके हैं। इस बार वह तीसरी बार विधायक बने हैं। इतने वरिष्ठ होने के बावजूद लक्ष्मण सिंह को मप्र कैबिनेट में जगह नहीं मिली।

गौरतलब है कि स्कूली शिक्षा विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी ने 28 जनवरी को आदेश जारी कर डेली कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल सुमेर सिंह और विनय बाकलीवाल को बोर्ड ऑफ गर्वनर्स में सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्ति किया था। अगले ही दिन यानी मंगलवार को डिप्टी सेक्रेटरी ने नया आदेश जारी कर अपने पुराने आदेश को तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया। इसके पीछे विभाग ने कोई कारण भी नहीं दिया।

इस मामले में सुमेर सिंह ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है कि वह अब लुधियाना (पंजाब) शिफ्ट हो रहे हैं और उनकी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं है। बाकलीवाल ने कहा कि मैं कहीं शिफ्ट नहीं हो रहा। मुझे नामांकित करने और अब हटाने के निर्णय सरकार के हैं। दोनों ही सूरत में मैं इन फैसलों को स्वीकार करता हूं।


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