क्या पैसे वसूलने को पॉजिटिव रिपोर्ट छिपा रहे हैं, इंदौर के हॉस्पिटल


 

इंदौर के प्रशासन पर रिपोर्ट में देरी, निजी हॉस्पिटल को फायदा पहुँचाने और सैंपल का बैकलॉग खड़ा करने के आरोप लग रहे हैं पर प्रसाशन यही कह रहा है -सब बढ़िया है।
इंदौर। इंदौर की प्रशासनिक व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में हैं। ताज़ा मामला इंदौर के तिलक नगर का है। इसमें एक पीड़ित की जांच रिपोर्ट पूरे 13 दिन बाद मिली। 9 अप्रैल को सैंपल लिया और रिपोर्ट उनकी मौत के दो दिन बाद 21 अप्रैल को मिली। इसमें सबसे बड़ी बात ये है कि गांधी मेडिकल कॉलेज का दावा है कि रिपोर्ट 11 तारीख को ही सिनर्जी हॉस्पिटल को भेज दी थी ,यदि रिपोर्ट भेज दी थी तो क्या सिनर्जी हॉस्पिटल ने सिर्फ अपने पैसे बनाने के लिए रिपोर्ट दबा ली। क्योंकि मृतक बड़जात्या के परिवार ने सिनर्जी हॉस्पिटल को 3.5 लाख का बिल दिया। यदि हॉस्पिटल ये बता देता कि वे कोरोना पॉजिटिव है, तो पूरा इलाज मुफ्त करना पड़ता। क्योंकि सिनर्जी हॉस्पिटल कोरोना के लिए सरकार का अधिग्रहित हॉस्पिटल है। इसके अलावा वक्त पर नहीं बताने से पीड़ित परिवार के कई लोगों को संक्रमण का खतरा बढ़ा है। इस सम्बन्ध ने शहर के जैन समाज ने एक पत्र भी लिखा है- इसे जस का तस प्रस्तुत कर रहे हैं।

*अपील*
आदरणीय
अभी 19 अप्रैल को समाज के जाने माने प्रतिष्ठित तिलक नगर दी जैन समाज के ट्रस्टी श्री ललित जी बड़जात्या का आकस्मिक देहविलय हो गया ।बड़े दुख की बात है कि उन्हे 8 अप्रैल की रात को सिनर्जी अस्पताल में भर्ती कराया गया । वहां 9 अप्रैल को उनकी कोविद 19 की जांच हेतु सेम्पल लिया गया ।
इसकी रिपोर्ट जो कि सामान्यतः 2-3 दिन में आ जाती है। परिजनों द्वारा हॉस्पिटल प्रबंधन से बार बार रिपोर्ट के बारे में पूछने पर पैसे के लालच में गोल गोल जवाब दिया जाता रहा ओर प्रबंधन द्वारा ललित जी के ठीक होने और कोरोना नही होने का झूठा आश्वासन दिया जाता रहा ओर आखिर में उनका 3.5 लाख का बिल बना दिया गया ।
अंततः श्री ललित जी ने 19 अप्रैल को अंतिम सांस ली ।और तुरंत ही रात्रि को 9 बजे उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

3 दिन की काफी जद्दोजहद के बाद उनकी जांच रिपोर्ट परिजनों एवम मित्रो द्वारा प्रसाशन से गुहार लगाकर अपर कलेक्टर श्री संतोष जी टैगोर के प्रयासों से (अस्पताल प्रबंधन द्वारा नही)हमे 21 अप्रैल को दोपहर में प्राप्त हुई ।जिसमें उनका कोरोना पीजिटिव आया । जबकि जांच रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि 11 अप्रैल को ही मेडीकल कॉलेज से रिपोर्ट दे दी गयी थी

अब प्रश्न यह उठता है कि
अगर रिपोर्ट पीजिटिव आई थी ओर समय पर प्राप्त होती तो शायद ललित जी को उचित इलाज द्वारा बचाया जा सकता था ।
इसमे अस्पताल प्रबंधन की जानबूझकर की गई गम्भीर लापरवाही सामने आती है जो कि अक्षम्य है।

दूसरा पहलू यह भी की आज  तक ललित जी के परिजनों की कोविद 19 की जांच नही की गई ।

आप सभी ललित जी के चाहने वाले मित्र/ परिचित / ओर समाज जन से अनुरोध है कि यह अपनी बात सभी व्हाट्सअप ग्रुप इंस्टाग्राम फेसबुक आदि के माध्यम से प्रसाशन एवम मंत्रालय तक पहुंचाने की कृपा करें । ताकि अस्पताल प्रबन्धन पर इस गम्भीर लापवाही पर कोई एक्शन लिया जा सके।
जय जिनेन्द्र

विनीत
आप ओर हम

(ये पत्र डॉक्टर आनंद रॉय की फेसबुक वॉल से साभार )

 


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