नेताओं के दिखावे पर न जाएं, मास्क जरूर लगाएं,ट्रम्प भी हुए पॉजिटिव और नरोत्तम का चेहरा उतरा


दर्शक

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी पत्नी दोनों कोरोना पॉजिटिव हो गए। इसमें हैरानी की कोई बात भी नहीं। जिस तरह से ट्रम्प बिना मास्क के घुमते रहते हैं, जो भी हुआ बहुत देर से हुआ। उनकी देखादेखी अमेरिका में कई संगठन भी मास्क के खिलाफ सड़क पर उतर आये। मास्क जलाये भी गए।

मास्क विरोधी दावा करते है कि मास्क पहनने की बंदिश उनके बुनियादी संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है। जिस तरह ट्रंप अधिकतर तथ्यों, तर्कों, और वैज्ञानिक बातों को खारिज करते रहते थे, उनका यह हाल होना ही था। अब उम्र भी इस बीमारी के लिए उनके साथ नहीं है, और उनकी नौजवान बीवी के मुकाबले उनके लिए यह अधिक खतरनाक है।

मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा भी ट्रम्प से कम नहीं। वे भी सीना ठोंककर कहते हैं, मैं मास्क नहीं पहनता। इससे क्या होता है। सोशल मीडिया और अखबारों में फजीहत के बात वे माने। वो भी भाजपा आलाकमान ने उनको फटकारा तब वे मास्क का महत्व बताने लगा।

उनका ये मास्क विरोधी अभियान विज्ञान के खिलाफ तो था ही पर भाजपा ने इसलिए हाथोंहाथ फटकारा क्योंकि ये मोदी के खिलाफ ज्यादा था। मोदी तमाम मंचो से घोषणा कर रहे है मास्क ही वैक्सीन है। जो न पहने उसपर जुर्माना होगा। देश में बहुत से प्रमुख लोग, खासकर नेता बिना मास्क दिखते हैं।

खुद प्रधानमंत्री मोदी मास्क के नाम पर जिस तरह से हलफ लगा और तह किया हुआ, प्रेस किया हुआ दुपट्टा चेहरे पर लपेटते हैं, वह नाक और मुंह को ढांकने के लिए बिल्कुल ही नाकाफी है। अब उन्होंने इसे अपना एक अंदाज बना लिया है।

जबकि मध्यप्रदेश में खासकर इंदौर में तो ऐसे गमछे को मास्क न मानते हुए चालान बनाये जा रहे हैं। प्रदेश में उपचुनाव में बड़ी-बड़ी सभाएं हो रही है। इनमे मास्क लगाए नेता भाषण मास्क को सरकाकर देते हैं। अरे,जब आप बोलते हैं मास्क तो उसी वक्त के लिए हैं, पर इन्हे कौन समझाए। मास्क की रस्म अदायगी को ट्रम्प को देखकर अब बंद कर देना चाहिए। इसे जरुरी मानते हुए सबको लगाना ही चाहिए।

खास और आम सभी किस्म के लोग मास्क को नीचे खींचकर ठुड्डी पर इस तरह ले आते हैं। कैमरे देखते ही नेताओं के मास्क उतर जाते हैं। अभी हाल के दिनों में अखबारों ने यह मुहिम भी शुरू की है। नेताओं की तस्वीरें वे तब तक नहीं छापेंगे जब तक वे मास्क लगाए हुए नहीं रहेंगे। लीडर मास्क पहनने लगेंगे तो जनता भी पहनेगी।

मोदी जी को भी गमछा छोड़कर मास्क पहनना चाहिए। आखिर उनके समर्थकों के संख्या करोड़ों में है। अब जैसे-जैसे लॉकडाउन घट रहा है, वैसे-वैसे इसके बढऩे के खतरे बढ़ते चलेंगे। दुनिया के कई देशों ने एक बार घटने के बाद कोरोना का ग्राफ फिर आसमान पर पहुंचते हुए देखा है।

हिन्दुस्तान और मध्यप्रदेश में अभी कोरोना को बढ़ते हुए ही देख रहे हैं, और बाकी दुनिया अगर कोई मिसाल है, तो हो सकता है कि आने वाले महीनों में घटने के बाद एक बार फिर इसका दूसरा दौर भी आए। यह बीमारी, इसका इलाज का खर्च, और पूरे परिवार को तोड़कर रख देता है।

एक बार इसके लपेटे में आ गए तो जरुरी नहीं कि महंगा इलाज आपको बचा ही लेगा। बड़ी-बड़ी हस्तियां इसका शिकार हो चुकी है। आज किसी भी मशहूर या ताकतवर व्यक्ति को अपने घमंड को, अपने दुस्साहस को संक्रामक नहीं बनने देना चाहिए ताकि वह लापरवाही बनकर दूसरों के दिमाग में भी घर कर जाए।

लोगों को सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों को रोकना-टोकना चाहिए जो कि मास्क उतारकर कैमरों के सामने अपना हॅंसता हुआ नूरानी चेहरा दिखाने को बेताब रहते हैं। लोगों को इस बारे में अधिक से अधिक लिखना चाहिए, कार्टून और दूसरे पोस्टर बनाने चाहिए, वॉट्सऐप पर फैलाना चाहिए, और सार्वजनिक रूप से लोगों को याद दिलाना चाहिए कि उनका चेहरा अभी भूल नहीं गया है। उसे ढांककर रखें। कोरोना के जाने के बाद मुंहदिखाई की जाएगी तब तक ट्रंप बनने की कोशिश न करें। कोरोना एक अदृश्य हमलावर है, और उसके सामने अपने चेहरे का दृश्य प्रस्तुत न करें।


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