शिव “राज” में उनके अपने भी पानी को तरसे!
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शिव “राज” में उनके अपने भी पानी को तरसे!

भोपाल, 20 अप्रैल।

भीषण गर्मी के इस दौर में मध्यप्रदेश के कई इलाकों में जबर्दस्त जलसंकट और सूखे से हाल बेहाल है। खुद मुख्यमंत्री के घर में ही लोगों का कंठ सूख रहा है। अंदजा लगाया जा सकता है कि राज्य के बाकी हिस्सों में हालात क्या होगें। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की विधानसभा बुधनी के एक गांव के हालात इतने विकराल हो चुके हैं कि तस्वीरें देखकर आप दंग रह जाएगें। गांव के लोग मीलों दूर सिर पर घडों से पीने के पानी की जुगत कर रहे हैं।

बुधनी विधानसभा के गांव जाट मुहाई में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। यहां पीने के पानी के लिए महिलाओं को मजदूरी और घर का काम छोडकर घंटों की मशक्कत के बाद एक घडा पानी जुटाना पड रहा है। महिलाएं गांव से दूर कई-कई मील दूर से एक साथ पानी लेकर आ रही है। गांव में पानी की टंकी बनी हुई है। घर-घर नल भी लगे हैं लेकिन इन नलों का कंठ भी सूख चुका है। बीते कई दिनों से नलों में भी एक बूंद पानी नहीं आ रहा है। हैरानी की बात ये है कि इन पानी देने के बजाय प्रशासन सौ रुपए महीना पानी का बिल लोगों को थमा रहा है। लोगों ने अपने विधायक मुख्यमंत्री से कई बार गुहार भी लगाई लेकिन हालात जस के तस ही है।

मुहाई गांव में हर सुबह पानी के लिए औरतों की लंबी कतार का ये नजारा आम हो गया है। गांव के कुंए, हैंडपंप और नल सबकुछ सूख चुके हैं। गांव के स्कूल में लगा इकलौता हैंडपंप चालू है लेकिन उसका पानी पीने काबिल नहीं है। हर दिन घर की महिलाएं पीने के पानी के लिए गांव से कोसो दूर खेतों में बने कुएं पर जाकर घडों से पानी लेकर आती है। गांव की ज्यादातर ये वो महिलाएं हैं जो मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालती हैं लेकिन पानी की किल्लत से दोहरी मार पड रही है। पानी लाने में आधा दिन हो जाता है इससे मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है। ये महिलाएं अपने विधायक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को कोस रही हैं।

करीब एक हजार की आबादी वाले गांव मुहाई में तीन साल पहले पानी की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने पानी की टंकी और घर-घर नल कनेक्शन बांटे थे। इसके बदले गरीब परिवारों से भी सौ रुपए प्रतिमाह वसूला जा रहा है। तीन साल से पानी की टंकी और नल तो लगे हैं लेकिन लोगों को बमुश्किल तीन महीने भी पानी नसीब नही हुआ। बीते कई दिनों से भीषण गर्मी के इस दौर में पानी का कोई सोर्स नहीं है। ग्रमीणों ने सीएम हेल्प लाईन में भी कई बार शिकायतें की लेकिन नतिजा सिफर ही है। अभी तो भीषण गर्मी के करीब दो महीने बाकी हैं। इलाके के तमाम जल स्त्रोत सूख चुके हैं। हालात अगर ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में लोगों को यहां से पलायन करने के लिए मजबूर होना पडेगा।

मध्यप्रदेश में इस साल कई जिलों में सूखे के हालात हैं। 18 जिलों की 132 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। यह निर्णय जिला कलेक्टरों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। अशोकनगर की 7, भिण्ड की 8, छतरपुर की 11, दमोह की 7, ग्वालियर की 5, पन्ना की 9, सागर की 11, सतना की 10, शिवपुरी की 9, सीधी की 7, टीकमगढ़ की 11, विदिशा की 11, शाजापुर की 7, श्योपुर की 5, मुरैना की 6, दतिया की 5, शहडोल की 2 और उमरिया की 1 तहसील को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।

‘केन्द्र सरकार से मध्यप्रदेश को पेयजल आपूर्ति के लिए 200 करोड रुपए मिले थे लेकिन ये पैसा कहां खर्च हुआ, इसके हिसाब के लिए उन्होनें आरटीआई लगाई थी लेकिन आज तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।’

– आनंद राय, आरटीआई एक्टिविस्ट

‘मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के अपने इलाके में ही दीया तले अंधेरा नजर आ रहा है। 13 साल से मुख्यमंत्री रहने के बावजूद यदि उन्ही के इलाके में राजधानी से महज 100 किलोमीटर इस गांव की दुर्दशा ऐसी है तो बाकी दूर-दराज गांवों की हालत क्या होगी अंदाजा लगाया जा सकता है। मध्यप्रदेश में ये कैसा विकास है जहां पीने के पानी की बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं हैं। ’

– अर्जुन आर्य, सामाजिक कार्यकर्ता, हमीदगंज

‘ऐसी कोई समस्या उस गांव में तो नहीं है। पीएचई विभाग से बोला है पता करने के लिए। यदि ऐसा कुछ है तो जल्द ही समस्या का समाधान करेगें। ’

– मेहताब सिंह, ज्वाईंट कलेक्टर- सिहोर

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