सुवासरा .. सिंधिया के करीबी को टिकट देने की आहट से ही कांग्रेस में बगावत और धोखे की सुगबुगाहट


सुवासरा सीट से पिछली बार सिर्फ 350 वोट से जीतने वाले हरदीप डंग अब भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं, उनके सामने कांग्रेस के राकेश पाटीदार और पीरूलाल डबकरा में से किसी एक को उतारने चर्चा, हालांकि सिंधिया परिवार के प्रति गहरी आस्था रखने वाले पाटीदार पर कांग्रेस को अभी भी संदेह

दर्शक
इंदौर। मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर उपचुनाव की जोर आजमाइश जारी है। कांग्रेस 15 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। बची हुई तरह सीटों में से सबसे ज्यादा चर्चा सुवासरा सीट को लेकर है। यहां से कांग्रेस से भाजपा में गए हरदीप सिंह डंग भाजपा के प्रत्याशी हैं। कांग्रेस ने अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।

डंग 2018 का विधानसभा चुनाव मात्र 350 वोट से जीते थे। अभी उन्हें जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस यदि यहां प्रत्याशी चयन में कमजोर पड़ती है तो ही डंग की जीतने की संभावना बनेगी। इलाके से पूर्व जनपद अध्यक्ष ओमप्रकाश भाटी, युवा कांग्रेस के राकेश पाटीदार और पीरूलाल डबकरा स्थानीय दावेदार हैं।

जानते है मंदसौर जिले की इस सबसे महत्वपूर्ण विधानसभा के दावेदारों के बारे में

सिंधिया के करीबी पाटीदार पर कांग्रेसियों को ही भरोसा नहीं।

पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की आगर मालवा की रैली के बाद राकेश पाटीदार बड़े दावेदार बनकर उभरे हैं। पाटीदार ने इस सभा में कार्यकर्ताओं की बड़ी भीड़ जुटाकर खुद को दौड़ में बनाया। पाटीदार ने इलाके में करीबियों से दावा किया कि उनका टिकट पक्का हो गया।

इलाके के कांग्रेसी हालांकि राकेश पाटीदार को लेकर बहुत भरोसा नहीं करते। स्थानीय राजनीति में ये बात मानी जाती है कि पाटीदार बगावत करके भाजपा में गए ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी हैं। सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर जाने पर भी वे आज तक सिंधिया के खिलाफ नहीं बोले। राकेश पाटीदार अभी भी सिंधिया के मामले में चुप ही रहते हैं।

लोगों का मानना है कि राकेश पाटीदार पर भरोसा करके कांग्रेस फिर धोखा का सकती है। पता नहीं कब पाटीदार सिंधिया के प्रति फिर अपनी आस्था सार्वजानिक कर दे। वे कभी भी पाला बदल सकते हैं। जनता की आम राय है कि पाटीदार को टिकट दिया तो वे बड़े अंतर से हारेंगे। उनको टिकट देने का मतलब है डंग को खुला मैदान मिल जाएगा।

पीरूलाल डबकरा जातिगत वोट और अनुभवी नेता

इस सीट से मजबूत दावेदार हैं, पीरूलाल डबकरा। विधानसभा चुनाव में डंग का पूरा चुनाव अभियान को डबकरा ही देखते रहे हैं। इस कारण वे इलाके की बारीकियां और डंग की कमजोर कड़ी भी अच्छे से जानते हैं।

इसके अलावा इलाके में पोरवाल, जैन समुदाय का समर्थन भी डबकरा को ही है। इलाके में करीब तीस हजार वोट पोरवाल समाज के हैं। हरदीप सिंह डंग का वैसे अपना कोई वोट बैंक नहीं है। पिछले चुनाव में वे शिवराज विरोधी मतों के चलते जीते बावजूद इसके उन्हें केवल 350 वोट से जीत मिली।

पीरूलाल की  इलाके में मजबूत पकड़ है। वे एक मजबूत स्थानीय दावेदार है। डबकरा को लेकर भोपाल खासकर कमलनाथ की राय बहुत मायने रखेगी। इलाके के लोगों का मानना है कि राकेश पाटीदार की तुलना में डबकरा बेहतर उम्मीदवार साबित होंगे

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ओम प्रकाश भाटी दौड़ में पिछड़ गए

ओम प्रकाश भाटी 15 दिन पहले तक दौड़ में सबसे आगे नजर आ रहे थे। पिछले दो सप्ताह में अचानक वे पिछड़ से गए। खासकर आगर मालवा की कांग्रेस की सभा के बाद। इसके अलावा जातिगत वोटों के समीकरण भी उनके पक्ष में नहीं दिख रहे। कांग्रेस इस उपचुनाव में कोई भी कमी नहीं छोड़ना चाहती। इसे देखते हुए भाटी पिछड़ते दिखाई दे रहे हैं।

मीनाक्षी नटराजन .. इलाके में वर्चस्व

कांग्रेस में किसी बड़े नाम को यहां से चुनाव में उतारने की भी चर्चा है। ऐसे में मंदसौर की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन सबसे मजबूत और प्रभावी दावेदार हैं। मीनाक्षी के नाम पर प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व दोनों की सहमति बनने में कोई मुश्किल नहीं है। पर स्थानीय नेता कितना सहयोग करेंगे, इसकी जमीनी रिपोर्ट पार्टी अभी तैयार कर रही है।

 

 


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