शिवराज के रिश्वत राज से त्रस्त हुआ बीजेपी का पूर्व मंत्री


 

 

मध्यप्रदेश में कई सालों तक शिवराज केबिनेट में रहे एक मंत्री से अपने ही इलाज के लिए रिश्नवत की मांग की जा रही है। त्रस्त होकर लाचार पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक ने पत्रकारों के सामने अपनी आपबीती सुनाते हुए शिवराज सरकार पर जमकर आरोप लगाए। मौजूदा दौर को दम घुटने वाला माहौल बताया। बीजेपी का यह नेता अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री भी रह चुका है और कई कद्वावर कांग्रेसियों को चुनाव में मात दे चुका है।

होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा से बीजेपी विधायक और शिवराज के पूर्व काबिना मंत्री सरताज सिहं ने होशंगाबाद में पत्रकारों के सामने अपनी ही सरकार के भ्रष्ट तंत्र की कलाई खोली। सरताज सिहं ने कहा कि कुछ दिन पहले वे अस्पताल मे भर्ती थे। अस्पताल का बिल पास करवाने के लिए उनसे कमिशन के नाम पर खुलेआम रिश्वत की मांग की गई। सरताज सिंह ने सीधे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा का नेतृत्व कमजोर हो गया है, हम जनता का विश्वास खो चुके हैं। उन्होने कहा कि सरकार के अफसरों से लोग बेहद परेशान हो चुके है। अफसर सुनते ही नहीं हैं। बिजली हो या राजस्व विभाग सबकी मनमर्जी चल रही है। प्रदेश में किसान, नौजवान और आम लोग सरकार और उसके सिस्टम से नाराज है। उन्होने कहा कि ऐसे महौल में तो अब उनका दम घुटने लगा है। सिंह ने कोलारस और मुंगावली के उपचुनावों में हुई पार्टी की हार की ठीकरा भी वरिष्ठ नेताओं पर फोडा है। सिंह ने कहा कि कार्यकर्ताओं की इज्जत करने वाली बीजेपी में अब उनके जैसे कार्यकर्ताओं का सम्मान भी नही रहा।

गौरतलब है कि सरताज सिंह शिवराज सरकार में पीडबल्यूडी और इससे पहले वन मंत्री रह चुके हैं। अटलबिहारी वाजपेयी की 13 दिनों की सरकार में भी सरताज सिंह स्वास्थ्य मंत्री थे। सरताज सिंह ने अपनी सीट से कई बार चुनाव जीते और कांग्रेस के कई दिग्गजों को मात दी। साल 2016 में 75 साल की उम्र का हवाला देकर सरताज सिंह और बाबुलाल गौर से मंत्री पद छीन लिए थे।

चुनावी साल में पूर्व मंत्री और बीजेपी के कद्वावर नेता सरताज सिंह का अपनी ही सरकार के खिलाफ यह बयान शिवराज की मुश्किले बढाने वाला है। उधर कांग्रेस ने सरताज सिंह के इस बयान को सोशल मीडिया में जारी कर शिवराज सरकार की घेराबंदी शुरु कर दी है। कांग्रेस का कहना है कि सरताज सिंह का यह बयान भ्रष्ट शिवराज सरकार की रिश्वतखोरी की 15 साल की कहानी को बयां करती है।


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