कैलाश विजयवर्गीय ने बदला रंग, बने रॉक स्टार, छेड़ी राजनीति की तान


इंदौर,  केसरिया दुपट्टा डाले सफेद कुर्ते पजामें में दिखने वाला बीजेपी का एक बडा नेता आज आपको यदि चमकीले कॉस्ट्यूम में गिटार बजाते हुए रॉक स्टार के भेष में इंदौर की सडकों पर दिखाई दे तो आप क्या कहेगें। आप हैरान रह जाएगें कि आखिर ये नेताजी रातों रात रॉक स्टार कैसे बन गए। यही नहीं रॉक स्टार बने इस नेता ने पूरे लटके-झटके के साथ गाना भी गाया मगर बोल तडकते-भडकते किसी गाने के नहीं बल्कि पॉलिटिक्स के एक स्लोगन को ही गाना बना डाला।

बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय उनके गृह नगर इंदौर में एक अलग ही रंग में नजर आए। उनका यह रंग उन्हे एकदम अलग ही पहचान दे रहा था। इंदौर में सोमवार की शाम कैलाश विजयवर्गीय जब सडक पर उतरे तो लोग उन्हे पहचान ही नहीं पा रहे थे। कोई उनके इस नए रुप के साथ सेल्फी खींच रहा था तो कोई उनसे हाथ मिलाने को बेताब था। यही नहीं उनके हाथों में गिटार और साथ में म्यूजिशियनों की एक पूरी टोली भी नजर आ रही थी। कैलाश ना सिर्फ रॉक स्टार के भेष में दिखाई दे रहे थे बल्कि उनके चेहरे पर मस्ती भी किसी रॉक स्टार की तरह ही साफ झलक रही थी।

दरअसल कैलाश विजयवर्गीय होली के बाद रंगपंचमी से ठीक एक दिन पहले बजरबट्टू सम्मेलन में हर साल शामिल होते है। बजरबट्टू सम्मेलन यानि हास्य कवि सम्मेलन। इंदौर में होली रंगपंचमी के दिन खेली जाती है इसलिए मस्ती का मूड शाम से ही बन जाता है। सोमवार की रात 8 बजे धर्मशाला से जैसे ही विजयवर्गीय रॉक स्टार के भेष में बाहर निकले तो उन्हे देखने वालों का हुजूम उमज पडा। रॉक स्टार बने विजयवर्गीय ने बीजेपी के स्लोगन ‘सबका साथ-सबका विकास’ को रॉक स्टार की तरह ही लटकते-झटकते गाया। रॉक स्टार कैलाश के इस गाने से यह साफ हो गया कि मध्यप्रदेश मे इस साल होने वाले चुनाव में इस स्लोगन का ही भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। रॉक स्टार कैलाश ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की और कहा कि मोदी देश के हर दिल में बसे हैं।     होली के दिन से रंगपंचमी तक यहां के लोग फेस्टिव मूड में रहते हैं। रंगपंचमी से एक दिन पहले इस बजरबट्टू सम्मेलन को देखने-सुनने के लिए पूरा शहर उमड पडता है। सम्मेलन से पहले शहर के बीचोबीच राजबाडा के पास खजूरी बाजार स्थित चुन्नीलाल धर्मशाला में विजयवर्गीय को अलग भेष में तैयार किया जाता है। हर साल उनका यह भेष गोपनीय रखा जाता है। कैलाश अब तक कई अलग-अलग भेष बदल चुके हैं। आयोजक ही इसस भेष को तय करते हैं। यहां तक कि विजयवर्गीय को भी नहीं मालूम होता है कि उन्हे आज क्या बनाया जाएगा। विजयवर्गीय के साथ पत्रकार और गणमान्य नागरिक भी अलग-अलग ड्रेस पहन कर अपना अलग भेष धारण करते हैं। यहां से बग्गियों में बैठाकर सभी बजरबट्टूओं को सम्मेलन स्थल मल्हारगंज स्थित गणेश मंदिर तक ले जाया जाता है। यहां होली की रंग-बिरंगी कविताओं के साथ लोग बजरबट्टू सम्मेलन का आनंद लेते हैं। हिंद मालवा संगठन की तरफ से हर साल आयोजित किए जाने वाला बजरबट्टू सम्मेलन का यह 21 वां साल था।


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