क्या कांग्रेस की उलझन के कारण “टाइगर ज़िंदा है” ..


सेनापति कमलनाथ अकेले ही युद्ध लड़ रहे, मंत्रियों को लेकर  कोई हलचल नहीं, अच्छे चेहरे ज्यादा है या आंतरिक खींचतान के कारण नहीं हो रहा मंत्रिमंडल का गठन

इंदौर। मध्यप्रदेश में कांग्रेस के नए मुख्यमंत्री कमलनाथ खूब सक्रीय हैं। पांच दिन में खूब सारी घोषणाएं कर दी। आदेश जारी हो गए। पर जो जरुरी काम है वो नहीं हो रहा। वो काम है मंत्रिमंडल के गठन का। पांच दिन बाद भी मंत्रियों के नाम तय न होना कई तरह के सवाल पैदा कर रहा है। उलझन इतनी बड़ी दिख रही है कि कोई इस बारे में बात तक नहीं कर रहा। कांग्रेस के विधायक और बड़े नेता भी चुप है। बसपा, सपा,
और निर्दलीयों से मिले समर्थन से बहुमत हासिल करने के अलावा और भी कई कारण हवाओं में तैर रहे हैं। शायद कांग्रेस के बेहद किनारे वाले बहुमत और मंत्रिमंडल की देरी के कारण ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया कि-टाइगर अभी ज़िंदा है, जल्द वापस लौटूंगा।

शिवराज की टाइगर ज़िंदा को जोड़ने के कई कारण है, कांग्रेस की उलझन, अंतरकलह, दिग्विजय का ये कहना कि भाजपा अब भी सरकार बनाने के लिए विद्यायकों के संपर्क में हैं। कमलनाथ दिल्ली पहुँच चुके हैं, पर मामला इतना आसान नहीं है। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस में ज्योतिरादित्य बड़ी चुनौती बन गए हैं। उनके चेहरे को आगे रखने के बाद जिस तरह से उन्हें किनारे किया गया है, इससे उनसे ज्यादा उनके
समर्थक नाराज हैं। सिंधिया अपने समर्थकों को मंत्रिमडल में आधी सीट और खुद प्रदेश अध्यक्ष का पद चाहते हैं। एक तरह से सिंधिया को दिग्विजय-कमलनाथ ने यूज ने थ्रो की तरह कर दिया।

दरअसल ,सिंधिया को सचिन पायलट को मिले रुतबे के बाद लगा कि वे दरकिनार कर दिए गए। पायलट ने उपमुख्यमंत्री पद के साथ साथ राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद भी अपने पास रखा। राजनीतिक गुणा भाग में यहां सिंधिया चूक गए। राहुल गांधी के साथ मीटिंग के दौरान वे खुद के लिए कुछ बेहतर मांग नहीं सके। इसका फायदा कमलनाथ-दिग्गी ने उठाया। समर्थक सिंधिया पर भी दवाब बना रहे हैं. यदि सिंधिया को उनके कद के अनुरूप कोई जिम्मेदारी नहीं मिली तो उनके समर्थक बगावत भी कर सकते हैं।
आखिर कांग्रेस क्यों मंत्रिमंडल में देरी कर रही है? जनता के बीच भी इसको लेकर कांग्रेस के प्रति बहुत अच्छा सन्देश नहीं जा रहा। सरकार की तरफ से भी कोई उचित कारण नहीं दिया गया। कमलनाथ भी लगातार घोषणाएं करके मंत्रिमंडल के मुद्दे से मीडिया और पब्लिक को दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं, ये उनकी एक कुशल रणनीति है।


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