देवास जिले की पांच में से चार सीटों पर जातियों ने बिगाड़े हैं गणित


चुनाव का जाति तंत्र

मध्यप्रदेश के चुनाव में पहली बार कई सीटों पर भिड़ते रहे जातियों के गणित, देवास जिले की पांच में से चार सीटों पर जातियों ने बिगाड़े हैं गणित
दीपक विश्वकर्मा, देवास
विस चुनाव में इस बार पूरे मध्यप्रदेश में बंपर मतदान हुआ है और दोनों ही दल इस मतदान को अपने पक्ष में मानकर चल रहे हैं। हालांकि दोनों ही दलों को अंदर ही अंदर यह डर सता रहा है कि कहीं यह बंपर मतदान उनके खिलाफ तो नहीं हुआ है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के अपने दावों के बीच एक बड़ी बात यह भी है कि इस बार प्रदेश की कई सीटों पर जातियोें ने प्रत्याशियों और पार्टियों के गणित खराब किए हैं।
मध्यप्रदेश में कहीं ब्राह्मण, कहीं ठाकुर, कहीं सिंधी, कहीं जाट, कहीं खाती, कहीं बलाई, कहीं मुस्लिम और इनकी तरह कई समाजों के वोटरों ने इस बार खासा जोर दिखाया है। सपाक्स और अजाक्स के लोगों ने भी कई सीटों पर समीकरण बिगाड़े हैं। कई प्रत्याशियों ने सिर्फ जातियों के भरोसे ही चुनाव लड़़ा है। इनमें निर्दलियों की संख्या खासी है। हालत ये है कि निर्दलीय जीत की स्थिति में तो कम स्थानांे पर हैं, लेकिन दोनों ही दलों का गणित बिगाड़ने की स्थिति लगभग सभी स्थानांे पर बना चुके हैं।
पांच में से चार पर जाति फैक्टर हावी
सिर्फ देवास जिले की बात करें, तो यहां पांच सीटों में से चार सीटों पर निर्दलिय और जातिगत प्रत्याशियों का बोल बाला है। देवास विस सीट पर जाति का फैक्टर बहुत हावी नहीं है, लेकिन यहां मराठा वोटरों को लुभाने के लिए निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं।
खाती-पाटीदारों ने बिगाड़े गणित
हाटपिपल्या विस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी खाती और पाटीदारों के दम पर रण जीतने की स्थिति में हैं। यहां जाति का फैक्टर बेहद हावी रहा। इनके सामने भाजपा प्रत्याशी राजपूत और ब्राह्मणों के ज्यादा भरोसे है।
बागली सीट का कोरकू फैक्टर
इस क्षेत्र में दोनों दलोें ने जिन प्रत्याशियों को टिकट दिया है, कोरकू समाज में उनका विरोध है। भाजपा के पहाड़सिंह पुलिस विभाग से नौकरी छोड़कर आए हैं, तो कांग्रेस के कमल का पुराना राजनीतिक अनुभव है। निर्दलीय तेरसिंह देवड़ा कोरकू हैं और इसी जाति के वोट बड़ी संख्या में हैं। दोनों दलों के प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ये वोटर कर सकते हैं।
ब्राह्मण, जाट के साथ यादव भी भारी
खातेगांव में ब्राह्मणों का बहुल है। यहां जाट, गुर्जर और यादव भी बहुत हैैं। भाजपा के आशीष शर्मा ब्राह्मणों के भरोसे है, तो कांग्रेस प्रत्याशी को जाट, गुर्जरों का भरोसा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों में भारी विरोध और बढ़ा मत प्रतिशत दोनों ही प्रत्याशियों की नींद खराब किए हुए है।
सोनकच्छ में असमंजस का चुनाव
इस क्षेत्र में कांग्रेस के कद्दावर नेता सज्जन वर्मा और भाजपा के राजेंद्र वर्मा ने खूब जोर आजमाईश की है। दोनों के प्रयासों, आरएसएस के भूमिगत प्रचार और जातियों के जोर से वोटिंग प्रतिशत 84 पर पहुंच गया। बलाई समाज के निर्दलीय प्रत्याशी के कारण भी दोनों के आंकड़े गड़बड़ा रहे हैं। कौन जीतेगा, यह दावे से कोई नहीं कह सकता।
11 दिसंबर तक बस कयास
अब 11 दिसंबर तक सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला पेटियों में बंद है। ऐसे में हर गली, कोने और चैराहे पर इन दिनों दोनों दलों के समर्थक और आम जनता सिर्फ कयास लगा रही है। प्रत्याशियों की हालत छटपटाहट वाली ही बनी रहेगी। बहरहाल देखना यह है कि प्रदेश की बंपर वोटिंग और जातियों में बंटे मतदाताओं ने किसके सिर पर सेहरा बांधा है। फिलहाल सबके अपने-अपने कयास हैं।


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