प्रदेश की सबसे चर्चित भिड़ंत होगी सांवेर में,सिलावट को चुनौती देंगे गुड्डू !


 

– 1977 के बाद यह पहला मौका होगा जब इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी सोनकर परिवार से नहीं होंगे, अधिकतर बाहरी प्रत्याशी ही जीते हैं क्षेत्र में

मिलिंद मुजुमदार (वरिष्ठ पत्रकार )

इंदौर। सांवेर अनुसूचित जाति सुरक्षित सीट के लिए होने वाला उपचुनाव प्रदेश का सर्वाधिक चर्चित चुनाव होने की संभावना है। यहां से भाजपा की ओर से प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट की उम्मीदवारी तय है। जबकि कांग्रेस दबंग दलित नेता और पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू को टिकट देने जा रही है। पूरी संभावना है कि इन्हीं दोनों के बीच सांवेर में सीधी टक्कर होगी। तुलसी सिलावट 1985, 2007 और 2008 तथा 2018 में यहां से कांग्रेस के टिकट पर चार बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। जबकि प्रेमचंद गुड्डू 1998 में इसी क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक चुने जा चुके हैं।

सनद रहे प्रदेश में 24 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव सितंबर में संभावित हैं। सांवेर में 1977 के बाद यह पहला मौका होगा जब कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों की ओर से सोनकर परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। इस सीट की विशेषता यह भी है कि यहां से अधिकतर बाहरी प्रत्याशी ही विजयी हुए हैं। सांवेर विधानसभा क्षेत्र में संघ परिवार का काफी प्रभाव है।भाजपा की पूर्ववर्ती पार्टी भारतीय जनसंघ 1967 में भी यहां से दीपक चिन्ह पर चुनाव जीत चुकी है। तब जनसंघ के बाबूलाल राठौर यहां से जीते थे। 1980 से 2018 तक यहां से भाजपा की ओर से केवल सोनकर परिवार के सदस्य ही चुनाव लड़े हैं।

खाती, धाकड़ कलोता, राजपूत और
दलित समाज का वर्चस्व है यहां…

सांवेर अनुसूचित जाति सुरक्षित सीट पर दलितों और खाती समाज के लगभग बराबर मतदाता हैं। जबकि कलोता राजपूत और धाकड़ समाज की भी पर्याप्त संख्या यहां है। दलितों में करीब 70 फ़ीसदी मतदाता बलाई समाज के हैं। जबकि भाजपा की ओर से संभावित उम्मीदवार तुलसीराम सिलावट खटीक समाज के हैं और कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार प्रेमचंद गुड्डू पासी दलित समाज के हैं।

सोनकर परिवार भी खटीक समाज में ही आता है। इस सीट पर करीब 40 हजार मतदाता दलित हैं, जबकि करीब 35 हजार मतदाता खाती समाज के और 30 हजार मतदाता कलोता राजपूत समाज के माने जाते हैं। जबकि राजपूत और धाकड़ समाज के 15 -15 हजार वोट सांवेर विधानसभा सीट में हैं। स्वर्गीय राधाकिशन मालवीय बलाई समाज के ऐसे अंतिम नेता थे जो 1972 में यहां से विधायक चुने गए अन्यथा यहां से हमेशा गैर बलाई दलित उम्मीदवार ही जीतते रहे हैं।

यह है सांवेर सीट का इतिहास..

1962 में यहां से कांग्रेस के सज्जन सिंह विश्नार, 1967 में भारतीय जनसंघ के बाबूलाल राठौर, 1972 में कांग्रेस के राधाकिशन मालवीय,1977 में जनता पार्टी के अर्जुन सिंह का घारू, 1980 में भारतीय जनता पार्टी के प्रकाश सोनकर, 1985 में कांग्रेस के तुलसीराम सिलावट, 1990 और 1993 में भाजपा के प्रकाश सोनकर, 1998 में कांग्रेस के प्रेमचंद गुड्डू, 2003 में भाजपा के प्रकाश सोनकर, 2007 में प्रकाश सोनकर के आकस्मिक निधन के कारण उपचुनाव हुआ था जिसमें कांग्रेस के तुलसी सिलावट ने स्वर्गीय सोनकर की पत्नी निशा प्रकाश सोनकर को हराया था। 2008 और 2018 में यहां से फिर तुलसीराम सिलावट कांग्रेस के टिकट पर जीते।
2013 में यहां से भाजपा के डॉ राजेश सोनकर विजई हुए थे। इनमें से कोई भी विधायक सांवेर विधानसभा क्षेत्र का मतदाता नहीं रहा है। अधिकतर विधायक इंदौर के निवासी रहे जबकि स्वर्गीय अर्जुन सिंह घारू महू के निवासी थे।

(साभार )


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