अनूपपुर में बिसाहूलाल सिंह के खिलाफ शिवराज के सामने बगावत


 

अनूपपुर के पूर्व विधायक और उपचुनाव के प्रभारी रामलाल रौतेल ने सोमवार कांग्रेस से आये
बिसाहूलाल के खिलाफ खुले आम नाराजगी जताई, भाजपा के भीतर से सिंधिया समर्थकों के खिलाफ बढ़ते माहौल से सरकार भी सकट में

इंदौर। रविवार को भाजपा की उपचुनाव फीडबैक में सिंधिया समर्थकों के खिलाफ बड़े नेताओं की बगावत की बात सोमवार को अनूपपुर में सामने आ गई। सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विकास कार्यों के भूमिपूजन को आये। इस आयोजन में भाजपा के पूर्व विधायक रामलाल रौतेल की नाराजगी खुलकर सामने आई। पूरे आयोजन में रौतेल मंच के नीचे ही रहे।

अनूपपुर में उपचुनाव होना है। रौतेल इस सीट के चुनाव प्रभारी भी है। रौतेल कांग्रेस से भाजपा में आये मंत्री बिसाहूलाल साहू से नाराज़ है। बिसालहूलाल सिंह रौतेल को हराकर ही कांग्रेस से जीते थे। चुनाव प्रभारी की नाराजगी का सीधा मतलब है कि कांग्रेस से आये नेताओं को भाजपा में कोई भी समर्थन को राज़ी है। ऐसे में न वे घर के रहे न घाट के। कांग्रेस के कट्टर वोट उन्हें मिलेंगे नहीं और भाजपाई तो खुले तौर पर बगावत कर ही रहे हैं।

मुख्यमंत्री के इस आयोजन में पूरे वक्त रौतेल मंच के नीचे बैठे रहे। नाराजगी भी उनके चेहरे पर साफ़ दिखाई दे रही थी।अफसर ही उन्हें पूरे वक्त मनाते रहे, पर वे नहीं माने। बाद में मीडिया से उन्होंने कहा कि कांग्रेस से आये बिसाहूलाल सिंह उनकी लगातार उपेक्षा कर रहे हैं। रौतेल बोले मैं जमीनी कार्यकर्त्ता हूँ, बाहरी लोगों के कारण मुझे पूछा नहीं जा रहा। मीडिया ने जब मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से पूर्व भाजपा विधायक की नाराजगी पर पूछा तो वे कोई जवाब नहीं दे सके। बिना कोई जवाब दिए मुख्यमंत्री तेज़ी से गाडी में बैठ गए।

27 में से 18 सीटों पर भाजपा में बगावत

इससे पहले रविवार को उपचुनाव की 27 सीटों के फीडबैक बैठक ने भाजपा की पेशानी पर बल ला दिया है। भाजपा को अपने ही नेताओं से भितरघात दिख रहा है। कांग्रेस से भाजपा में लाये गए सिंधिया समर्थकों की सीट पर बगावत दिखाई दे रही है। सिंधिया समर्थकों की 18 सीटें ऐसी है, जिसपर भाजपाई कोई भी मदद को तैयार नहीं है।

रविवार को भाजपा विधायक, मंत्री व सांसदों की बैठक में ये खुलकर सामने आ गया। छह से ज्यादा मंत्री और करीब दस विधायक उन सीटों पर अब तक गए ही नहीं जहां के वे प्रभारी हैं। जिन सीटों पर प्रभारी जा रहे हैं, वहां भी वे बहुत गंभीर नहीं हैं। सिंधिया के ख़ास तुलसी सिलावट और गोविन्द सिंह राजपूत की सीट पर भी अंदरखाने यही हाल है।

मालवा निमाड़ की सीटों पर कोई सक्रियता नहीं है। 16 सीटों वाले चम्बल-ग्वालियर में सब कुछ ज्योतिरादित्य सिंधिया के भरोसे हैं। वहां प्रभात झा और जयभान सिंह पवैया के अलावा सिंधिया को लोकसभा चुनाव में परास्त करने वाले केपी सिंह यादव भी बहुत सक्रिय नहीं हैं। सिंधिया अपने ग्वालियर दौरे में बड़ी बगावत का सामना कर चुके हैं। बदनावर सीट पर राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव भी बहुत संकट में हैं।


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