शादी में जाना गुनाह नहीं, फिर राहुल पर इतना हंगामा क्यों ?

 

दरअसल हिन्दुस्तान में शिष्टाचार के पैमानों को बुलडोजर से कुचलकर खत्म कर दिया गया है, और बेशर्मी का बैनर टांग दिया  है

सुनील कुमार (वरिष्ठ पत्रकार )

राहुल गांधी के बारे में किसी सनसनीखेज दिखती खबर का आना उनके विरोधियों और आलोचकों के लिए अच्छे दिन आ जाने से भी अच्छा होता है। अभी उनका एक वीडियो आया जिसमें वे किसी एक पार्टी में खड़े दिख रहे हैं जहां आसपास कुछ विदेशी हैं, कुछ संगीत चल रहा है, पास में एक महिला खड़ी है, और इसके साथ यह जानकारी थी कि वे नेपाल में एक शादी की दावत में थे।

विरोधियों को इससे अधिक और लगता क्या है, नफरत को तिल का ताड़ बनाने में खाद नहीं लगता। इस बात को हिन्दुस्तान के हालात से, राजस्थान के जोधपुर में चल रहे साम्प्रदायिक तनाव से, भारत में कांग्रेस पार्टी की बदहाली से जोडक़र देखा गया, और भाजपा के सबसे बड़े प्रवक्ताओं ने यह हमला बोल दिया कि कांग्रेस नेता अपने घर को सम्हालना छोडक़र नाईट क्लब में पार्टी कर रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी ने इस पर साफ किया कि राहुल गांधी अपनी एक दोस्त, एक अंतरराष्ट्रीय पत्रकार, सीएनएन की पूर्व संवाददाता की शादी में काठमांडू गए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा के नेताओं से यह भी सवाल किया कि आज सुबह तक तो इस देश का कानून यह था कि आप अपने रिश्तेदारों या दोस्तों की शादी के समारोह में शामिल हो सकते हैं, हो सकता है कि कल से गृहस्थ बनना और शादी समारोह में हिस्सा लेना जुर्म हो जाए क्योंकि ये आरएसएस को पसंद नहीं है।

कांग्रेस के लोगों और आम लोगों ने सोशल मीडिया पर यह भी याद दिलाया कि राहुल गांधी तो शादी के एक न्यौते पर एक मित्र देश नेपाल में एक समारोह में गए थे, वे बिना बुलाए एक शत्रु देश में जन्मदिन का केक काटने नहीं गए थे जैसे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नवाज शरीफ के घर की दावत में पाकिस्तान पहुंच गए थे।

जब देश नफरत के आधार पर दो या दो से अधिक हिस्सों में बांट दिया गया हो, तो फिर लोगों का किसी सच से या किसी इतिहास से कुछ लेना-देना नहीं रहता। एक शादी की दावत में पहुंचे हुए राहुल गांधी को लेकर भाजपा के नेताओं ने इतना बवाल खड़ा किया है कि मानो यह किसी किस्म की बदचलनी हो।

राहुल गांधी तो किसी क्लब में चल रही इस पार्टी में अपने दोनों हाथ अपने मोबाइल फोन पर रखे हुए दिख रहे हैं, उनके हाथ में गर कोई ग्लास होता, तो उनके आलोचक अब तक दारू के ब्रांड की अटकलें भी लगाते रहते।

राहुल गांधी और उनके परिवार ने सार्वजनिक रूप से अब तक कोई भी अशोभनीय काम नहीं किया है। पूरा परिवार अपनी जिंदगी को लेकर बहुत सावधानी से चलता है, और अगर किसी मौके पर राहुल गांधी पर यह तोहमत लगाने की बात भी उनके विरोधियों को सूझ रही है कि वे राजस्थान में साम्प्रदायिक तनाव को छोडक़र विदेश गए हुए हैं, तो कम से कम भाजपा के लोगों को तो यह याद रखना चाहिए कि पिछले बरसों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सौ-पचास बार विदेश गए हैं, और हर बार देश के किसी न किसी हिस्से में कोई न कोई तनाव तो चलते ही रहता है।

फिर भाजपा के प्रवक्ताओं और पदाधिकारियों को यह भी साफ करना चाहिए कि क्या किसी नाईट क्लब की पार्टी में जाना देश की संस्कृति के खिलाफ है? राहुल गांधी तो बिना शराब वहां दिख रहे थे, लेकिन हिन्दुस्तान में भाजपा के कुछ सबसे बड़े नेता भी अपने निजी जीवन में आसपास के कई लोगों से अपने पीने को लेकर खुले हुए थे।

राहुल गांधी पर बहुत ही घटिया हमले के जवाब में हम यहां पर भाजपा के उन नेताओं के नाम गिनाना नहीं चाहते जिनके महिलाओं से भी संबंध रहे, जिन्होंने खुलकर यह कहा कि वे अविवाहित हैं, लेकिन कुंवारे नहीं, जिनके पीने के बारे में अब तक दर्जन भर से अधिक जीवनियों में लिखा जा चुका है, और दर्जनों इंटरव्यू में करीबी जानकारों ने कहा हुआ है।

ऐसे में किसी नेता के घोषित तौर पर, सार्वजनिक इंतजाम के बीच एक शादी के खुले समारोह में जाना अगर एक बखेड़े का सामान बनाया जा रहा है, तो फिर ऐसा सामान किस पार्टी के किस नेता के घर-परिवार से बरामद नहीं किया जा सकता?

लेकिन आज हिन्दुस्तान में बेरोजगारी जितनी अधिक है, और धार्मिक-साम्प्रदायिक आधार पर नफरत जितनी अधिक फैलाई जा चुकी है, उसमें राहुल-सोनिया के बारे में कुछ भी कहकर बखेड़ा खड़ा किया जा सकता है।

अपने देश की मान्य संस्कृति के मुताबिक अगर सोनिया गांधी इटली में अपने छात्र जीवन में किसी रेस्त्रां या बार में वेट्रेस का काम करती थीं, तो उसे हिन्दुस्तान में उनके विरोधी एक कलंक की तरह पेश करते हैं।

अपने पढऩे और जीने के लिए छात्र जीवन से ही कुछ घंटे काम करके कमाई करने की गौरवशाली परंपरा की जरूरत उन लोगों को जरूर नहीं पड़ती है जो कि हिन्दुस्तान के नेताओं की औलाद हैं, और यहां के पैसों पर विदेशों में पढऩे जाते हैं। बाकी तो पश्चिम के देशों में अरबपतियों के बच्चे भी कॉलेज की पढ़ाई करते हुए काम करते ही हैं।

बहुत सी पार्टियों में बहुत से नेताओं की निजी जिंदगी में सामाजिक पैमानों से परे की बातें रहती हैं जो कि सार्वजनिक भी होते रहती हैं, लेकिन राहुल गांधी के एक दावत में जाने में तो ऐसा कुछ भी नहीं दिखता जिसे लेकर उनकी आलोचक पार्टी इतनी उत्तेजना में आ जाए!

दरअसल हिन्दुस्तान में शिष्टाचार के पैमानों को बुलडोजर से कुचलकर खत्म कर दिया गया है, और बेशर्मी का बैनर टांग दिया गया है। जब तक हिन्दुस्तानी जनता का एक हिस्सा फुटपाथी मदारी के जुमलों पर जुटने वाली भीड़ की तरह बना रहेगा, तब तक ऐसे ओछे हमले भी जारी रहेंगे।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *