JDU Leaders Resignation

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वक्फ संशोधन बिल पर बिहार में सियासी संग्राम, 7 मुस्लिम नेताओं ने दिया JDU से इस्तीफा

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JDU Leaders Resignation: वक्फ संशोधन बिल को लेकर बिहार की राजनीति में भारी उथल-पुथल मची है। मोदी सरकार को समर्थन देने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में बगावत के सुर तेज हो गए हैं।

पार्टी के कई मुस्लिम नेताओं ने नाराजगी जताते हुए इस्तीफा दे दिया है। अब तक 7 मुस्लिम नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है और नीतीश सरकार पर ‘भरोसा तोड़ने’ का आरोप लगाया है। वहीं, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने बिल का विरोध करने वालों को देशद्रोही कह डाला है, जिससे मामला और गर्मा गया है।

वक्फ बिल पर मोदी का साथ देकर घिरे नीतीश

वक्फ बिल पर समर्थन से नाराज जिन 7 मुस्लिम नेताओं ने JDU छोड़ी है, उनमें प्रमुख नाम हैं:

  1. पूर्व प्रदेश सचिव एम. राजू नैयर
  2. अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मोहम्मद शाहनवाज मलिक
  3. बेतिया जिला के उपाध्यक्ष नदीम अख्तर
  4. प्रदेश महासचिव सिएन मो. तबरेज सिद्दीकी अली
  5. भोजपुर से पार्टी सदस्य मो. दिलशान राईन
  6. पूर्व प्रत्याशी (ढाका विधानसभा) मोहम्मद कासिम अंसारी
  7. नवादा जिले के जेडीयू जिला सचिव मोहम्मद फिरोज खान

इन सभी नेताओं ने एक सुर में पार्टी पर मुसलमानों के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा मुसलमानों के लिए एक भावनात्मक और धार्मिक मुद्दा है और इस पर कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा।

मुस्लिम नेताओं और संगठनों का आरोप है कि केंद्र सरकार वक्फ संपत्तियों पर कब्जा जमाना चाहती है। पहले अल्पसंख्यकों की स्कॉलरशिप खत्म की गई, फिर बजट में कटौती और अब वक्फ की जमीनों पर नज़र। वे इसे सुनियोजित हमला बता रहे हैं।

‘CM नीतीश ने मुसलमानों का भरोसा तोड़ा’

पार्टी छोड़ने वाले नेताओं का कहना है कि वक्फ संशोधन बिल मुसलमानों की धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक संस्थाओं पर हमला है और इस पर समर्थन देकर जदयू ने अपनी सेक्युलर छवि को दागदार कर दिया है।

मोहम्मद कासिम अंसारी ने एक पत्र के माध्यम से नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि JDU ने वक्फ बिल पर समर्थन देकर लाखों मुसलमानों का विश्वास तोड़ा है। वहीं, मोहम्मद शाहनवाज मलिक ने कहा है कि हम सालों तक पार्टी के साथ रहे, लेकिन अब पार्टी की दिशा और सोच बदल गई है।

JDU ने किया इस्तीफों को खारिज

विरोध बढ़ने के बाद JDU इस बगावत को तवज्जो देने से इनकार कर रही है। पार्टी की तरफ से इन इस्तीफों को महत्वहीन बताते हुए कहा है गया कि कासिम अंसारी और नवाज मलिक जैसे नेता जदयू के किसी भी आधिकारिक पद पर नहीं हैं।

जदयू के जिला अध्यक्ष मंजू देवी और प्रखंड अध्यक्ष नेहाल ने तो यहां तक कह दिया कि कासिम अंसारी का पार्टी से कोई संबंध नहीं है। पार्टी का कहना है कि अंसारी ने कभी जदयू के टिकट पर चुनाव भी नहीं लड़ा।

डिप्टी सीएम का विवादित बयान

इधर डिप्टी सीएम के विवादित बयान से मामला और गर्मा गया है। विजय कुमार सिन्हा ने बिल का विरोध करने वालों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह पाकिस्तान नहीं, हिंदुस्तान है।

उन्होंने कहा कि जो संसद में पास कानून को नहीं मानते, वे देशद्रोही हैं। ऐसे लोगों की तुरंत पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने विरोध करने वालों को भ्रष्टाचारी और समाज को गुमराह करने वाला बताया।

पार्टी के भीतर नजर आ रहा असंतोष

जदयू के अंदर भी विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं। नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले पार्टी के MLC गुलाम गौस ने वक्फ संशोधन बिल का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस बिल के जरिए वक्फ बोर्ड की जमीनें छीनी जा रही हैं, जबकि उन जमीनों से मुसलमानों के लिए सामाजिक कार्य होते हैं।

पूर्व MLC और एदारा-ए-शरिया के अध्यक्ष मौलाना गुलाम रसूल बलियावी ने भी इस बिल को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि अब सेक्युलर और कम्युनल में कोई फर्क नहीं रहा। इदारा-ए-शरिया देशभर के हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहा है।

नीतीश के बचाव में उतरे पप्पू यादव

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि नीतीश कुमार सेक्युलर थे, हैं और रहेंगे… लेकिन अब उनकी पार्टी उनके नियंत्रण में नहीं रही। उनके नेता आरक्षण विरोधी हो चुके हैं।

वहीं जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी पार्टी और नीतीश कुमार का समर्थन किया और कहा कि CM हमेशा अल्पसंख्यकों के साथ खड़े रहे हैं। राजद के नेताओं ने मुस्लिम संपत्तियों पर कब्जा किया है और अब हमें सेक्युलरिज्म सिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ नेता व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के चलते पार्टी छोड़ रहे हैं, इससे पार्टी की मूल विचारधारा पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

बहरहाल, यह मुद्दा आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक मोड़ ले सकता है, खासकर जब मामला सीधे तौर पर धार्मिक और सामाजिक भावना से जुड़ा हो।

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