सिद्धू ने सियासी दलों के लोकलुभावन वायदों पर सवाल उठाया

 -केबल टीवी के रेट को लेकर चन्‍नी पर किया हमला

अमृतसर। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बार फिर से सियासी दलों के  नेताओं द्वारा की जा रही लोकलुभावनी घोषणाओं पर सवाल उठाया है।

सिद्धू ने कहा कि पंजाब के लोगों का शार्टकट और स्कीमों वाले कामों से भला होने वाला नहीं है। जुगाड़ वाले काम लांगटर्म में काम नहीं करते। लोगों को लुभाने वाले लॉलीपॉप जैसी घोषणाओं से नेता चुनाव जीतने का जुगाड़ कर लेते हैं।नेता इसे स्‍कीम कह लेते हैं।

स्कीम से कहीं ज्यादा पावरफुल चीज पॉलिसी होती है और पॉलिसी रिसर्च के साथ बनती है। पंजाब का भला लांगटर्म के कार्यों से ही होगा।

इसके साथ ही उन्‍होंने केबल टीवी की दर को लेकर पंजाब के मुख्‍यमंत्री चरणजीत सिंह चन्‍नी पर भी निशाना साधा।

सिद्धू ने यहां मी‍डिया से बातचीत में कहा कि किसी राज्‍य की नीति (Policy) पिछले 15-20 सालों के इतिहास व परिस्थितियों  को देखकर बनती है।

पॉलिसी में बजट की एलोकेशन होती है। उसमें बताया जाता है कि अगर कोई स्कीम लांच होनी है तो उसके लिए इतना बजट है।

उन्होंने सीएम चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा केबल टीवी का रेट 100 रुपये प्रति माह करने की बात पर भी कटाक्ष किया। सिद्धू ने कहा कि केबल टीवी का न्‍यूनतम मासिक रेट तो 130 रुपये ट्राई द्वारा निर्धारित है, इसलिए ऐसा संभव नहीं है लेकिन जो सीएम ने कहा है उसे हम पूरा करके देंगे। चार साल मेहनत करके इंटरटेनमेंट का कानून लेकर आए थे, जो कैबिनेट में धक्के खाता रहा।

उन्‍होंने कहा कि आज हमारे सीएम पर निशाना साधने वाले लोग वही हैं जो ईडी के हाथों में रबड़ के पुतले की तरह नाचते थे। सीएम चन्‍नी का नजरिया ठीक है।

जो पिछले साढ़े चार साल में नहीं किया गया वह वह चन्नी ने तीन माह में कर दिखाया है। अगर कुछ कमियां रह गई हैं, तो वे भी दूर होंगी। क्योंकि, यह जो कुछ हो रहा है वह पार्टी और लाखों कार्यकर्ताओं के कहने पर हो रहा है। सीएम चन्‍नी यह अकेला नहीं कर रहे।

सिद्धू ने कहा कि 13  सूत्रीय पंजाब मॉडल के लिए हम पूरा बजट एलोकेशन देंगे। सीएम को ‘एलान ए जीत सिंह चन्नी’ कहे जाने पर उन्होंने कहा कि मैं किसी पर सवाल नहीं उठाता।

मैं ये सवाल पिछले चार सालों से उठा रहा हूं। अगर फंड आपके पास नहीं है और आप सिर्फ घोषणाएं कर रहे हैं तो लोगों का भला कैसे होगा।

उन्‍होंने कहा कि अगर कोई 26 लाख नौकरी देने का दम भरता है तो इसका साफ मतलब है कि इसके लिए 93 हजार करोड़ का बजट चाहिए। हर महिला को 1000 रुपये प्रति मा‍ह देने के लिए 12000 करोड़ हर साल चाहिए।

दो किलो वाट फ्री बिजली देने का मतलब 3600 करोड़ इसका हो गया। 110000 करोड़ हवा में बांट दिया गया है जबकि सरकार का बजट 72000 करोड़ का है। मेरा पंजाब मॉडल इस तरह की बातें नहीं कहता। खजाना खाली कैसे हुआ है बल्कि पंजाब मॉडल यह कहता कि खजाना भरेगा कैसे।

केजरीवाल तो अन्ना के घोड़े पर सवार होकर सत्ता में आ गए,  जबकि वहां (दिल्‍ली में) पुल कैसे बनेंगे और विकास कैसे होगा यह तो शीला दीक्षित ने बताया था।

पंजाब और दिल्ली के हालातों में बहुत फर्क है। दिल्ली आत्मनिर्भर राज्य है और हम पर सात लाख करोड़ का कर्जा है।

जो बसों और रेत से बजट पूरा करने की बातें करते हैं वे गलत है क्योंकि इससे तो सिर्फ 3000 करोड़ ही आता है। हमारे सीएम ने जो कहा हमारी पार्टी उस पर डट कर स्टैंड लेगी।

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