MP CM Suspended 4 Officers: भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए शुक्रवार को हुई समाधान ऑनलाइन बैठक के दौरान चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही सिवनी जिले के थाना प्रभारी (टीआई) और एसडीओपी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस वर्चुअल बैठक में प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, आईजी, कमिश्नर और अन्य अधिकारी मौजूद थे।
किन अफसरों को किया गया निलंबित और क्यों?
मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों में प्रशासनिक कार्यों में देरी और लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर सख्त कार्रवाई की। निलंबित किए गए अधिकारियों में निम्नलिखित शामिल हैं:
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राजेंद्र शुक्ल, तहसीलदार, जवा (रीवा)
- आरोप: एक रहवासी की भैंस मरने के बाद आरबीसी 6(4) के तहत दी जाने वाली आर्थिक सहायता समय पर नहीं दी गई।
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महेश पटेल, प्रभारी सीएमओ, नगर पंचायत (मऊगंज)
- आरोप: मऊगंज कस्बे के वार्ड नंबर 1 की एक कॉलोनी में पिछले तीन महीनों से पानी की सप्लाई बाधित थी, जिसके संबंध में सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज की गई थी। बावजूद इसके, समाधान नहीं किया गया।
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राजेश प्रताप सिंह, उपयंत्री, नगर पंचायत (मऊगंज)
- आरोप: नगर पंचायत के उपयंत्री राजेश प्रताप सिंह पर पेयजल आपूर्ति में लापरवाही बरतने का आरोप है।
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छिंदवाड़ा जिले के एक सचिव भी निलंबित
- आरोप: कपिलधारा योजना के तहत बनाए जाने वाले कुएं के भुगतान में देरी।
विदिशा, टीकमगढ़ और खंडवा के अधिकारियों पर भी कार्रवाई
अन्य जिलों में भी प्रशासनिक लापरवाही पर मुख्यमंत्री ने सख्ती दिखाई:
- विदिशा: मुद्रा योजना के तहत लाभार्थियों को लाभ न मिलने के कारण सीएमओ को नोटिस जारी किया गया। साथ ही, लीड बैंक मैनेजर के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई।
- टीकमगढ़: बकरी पालन योजना में अनुदान की फाइल गायब होने के मामले में समाधान ऑनलाइन बैठक के दौरान अनुदान तुरंत जारी कराया गया।
- खंडवा: दिव्यांगजनों को 193 दिनों से पेंशन नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। इस मामले में सामाजिक न्याय विभाग के उप संचालक पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
सिवनी-सीहोर के अधिकारियों पर भी गिरी गाज
मुख्यमंत्री ने सिवनी जिले में बच्चों, महिलाओं और युवतियों के गुम होने और अपहरण की घटनाओं पर संज्ञान लिया। उन्होंने पाया कि कई मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने टीआई और एसडीओपी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा, सीहोर जिले में नल जल योजना के अंतर्गत पानी की आपूर्ति में गड़बड़ी पाई गई। मुख्यमंत्री ने इस मामले में कड़ी नाराजगी जताई और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि चिन्हित गांवों के अंतिम छोर तक पानी की सप्लाई हो। उन्होंने कहा कि जब पानी देने का निर्णय हुआ है, तो ऐसी स्थिति क्यों बनी?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक में स्पष्ट कर दिया कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक शीघ्र पहुंचना चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी जिलों के कलेक्टरों और अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता की शिकायतों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा सामने आई, तो और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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