Kejriwal Vs Modi: अमेरिकी कपास पर 11% इम्पोर्ट ड्यूटी हटाने के फैसले ने भारतीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए इसे किसानों के साथ ‘धोखा’ करार दिया है।
वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि यह कदम टेक्सटाइल इंडस्ट्री की डिमांड और निर्यातकों को राहत देने के लिए उठाया गया है।
किसानों को आत्महत्या की ओर धकेला जा रहा
गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है।
उनका आरोप था कि पहले अमेरिका से आने वाले कपास पर 11% इम्पोर्ट ड्यूटी लगती थी, लेकिन अब यह टैक्स हटा दिया गया है।
19 अगस्त से 30 सितंबर तक अमेरिकी कपास टैक्स-फ्री रहेगा और इससे भारतीय बाजार में अमेरिकी कपास 15–20 रुपये प्रति किलो सस्ती मिल जाएगी।
केजरीवाल का कहना है कि जब अक्टूबर में भारतीय किसान अपनी कपास मंडियों में लेकर जाएंगे।
तब तक टेक्सटाइल इंडस्ट्री सस्ते अमेरिकी कपास से अपनी जरूरत पूरी कर चुकी होगी।
ऐसे में भारतीय किसानों की फसल की खरीद कम हो जाएगी और उन्हें घाटा उठाना पड़ेगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि इससे किसानों में आत्महत्या की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
मोदी जी ने Trump के दबाव में भारत के किसानों से किया धोखा‼️
👉 मोदी जी ने Donald Trump के दबाव में आकर अमेरिका से आने वाली कपास पर लगी 11% की Import Duty हटा दी
👉 इससे अमेरिकी कपास सस्ती हो जाएगी और Textile Industry अमेरिकी कपास ही ख़रीदेगी। ऐसे में भारतीय किसानों की कपास कौन… pic.twitter.com/xyJpD9FwkE
— AAP (@AamAadmiParty) August 28, 2025
AAP करेगी किसानों की रैली
केजरीवाल ने अपने आरोपों को और आगे बढ़ाते हुए कहा कि अमेरिका में उद्योगपति अडाणी के खिलाफ केस चल रहा है।
उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार अडाणी को बचाने के लिए अमेरिकी कपास पर ड्यूटी हटा रही है।
उन्होंने इसे देश के किसानों और नागरिकों के साथ धोखा बताया।
आम आदमी पार्टी प्रमुख ने घोषणा की कि 7 सितंबर को गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के चोटीला में किसानों के हक में बड़ी सभा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सुरेंद्रनगर गुजरात का सबसे बड़ा कपास उत्पादक क्षेत्र है और वहां के किसानों की हालत गंभीर हो सकती है।
इस सभा के जरिए वे किसानों की आवाज उठाएंगे और अन्य राजनीतिक दलों Qj किसान संगठनों से भी अपील करेंगे कि वे इस मुद्दे पर एकजुट हों।
केजरीवाल ने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका ने जब यूरोपियन यूनियन से आने वाली कारों पर 25% टैरिफ लगाया, तो यूरोपियन यूनियन ने अमेरिकी बाइकों पर 50% टैरिफ बढ़ा दिया।
इसी तरह अमेरिका ने चीन पर 145% टैरिफ लगाया तो चीन ने 125% का पलटवार किया। कनाडा ने भी अमेरिकी टैरिफ का करारा जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रम्प जैसे देशों के सामने झुक गए, लेकिन मोदी सरकार भीगी बिल्ली बनी हुई है।
पता नहीं मोदी जी की क्या मजबूरी है कि वे अमेरिकी हित में फैसले कर रहे हैं और भारतीय किसानों को बर्बाद कर रहे हैं।
मोदी जी, आपकी ऐसी क्या मजबूरी है जो आप Trump के आगे भीगी बिल्ली बने हुए हो⁉️ pic.twitter.com/F7PVipxNGE
— AAP (@AamAadmiParty) August 28, 2025
इंडस्ट्री की मांग पर फैसला- केंद्र सरकार
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने इस फैसले को लेकर सफाई दी है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने और निर्यात को सपोर्ट करने के लिए यह छूट दी गई है।
पहले यह छूट 19 अगस्त से 30 सितंबर तक के लिए लागू थी, लेकिन अब इसे 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है।
सरकार का कहना है कि यह अस्थायी राहत है, ताकि घरेलू टेक्सटाइल कंपनियों को लगातार कपास की सप्लाई मिलती रहे।
बहरहाल, इस फैसले से साफ है कि भारतीय किसान और इंडस्ट्री के बीच सीधा टकराव की स्थिति बन गई है।
जहां किसानों का आरोप है कि उनकी उपज सस्ती अमेरिकी कपास की वजह से नहीं बिकेगी।
वहीं, इंडस्ट्री का कहना है कि उन्हें निरंतर और सस्ती सप्लाई चाहिए ताकि निर्यात प्रतिस्पर्धी बने रह सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक रंग ले सकता है, खासकर गुजरात और महाराष्ट्र जैसे कपास उत्पादक राज्यों में।
किसान संगठनों और विपक्षी दलों के जुड़ने पर यह विवाद मोदी सरकार के लिए चुनौती खड़ा कर सकता है।
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