प्रदेश में सिर्फ ‘कमल’ – कृषि मंत्री कमल पटेल पहुंचे उस गांव में जहां आज़ादी के बाद आज तक कोई मंत्री नहीं आया


 

मध्यप्रदेश के उपचुनावों में इस वक्त प्रदेश में सबसे सक्रिय मंत्रियों में हैं कमल पटेल। पटेल लगातार पूरे प्रदेश के गांव-गांव में घूम रहे हैं

मान्धाता। मध्यप्रदेश में इस वक्त बेहद सक्रिय हैं भाजपा के मंत्री कमल पटेल। कृषि मंत्री कमल पटेल पूरे वक्त मैदान में हैं खुद  सिंधिया कमल पटेल की लगातार तारीफ कर रहे हैं। पटेल की किसानों के बीच मजबूत छवि बन रही है।

रविवार को कमल पटेल खंडवा जिले के आदिवासी गांव सिरकिया पहुंचे। यहां के आदिवासियों ने पहली बार अपने बीच किसी मंत्री को देखा। आज़ादी के बाद से इस सुदूर आदिवासी गांव में आज तक कोई मंत्री नहीं पहुंचा। इस आदिवासी अंचल में पहुंचने वाले कमल पटेल पहले मंत्री हैं।

खंडवा जिले के पामाखेड़ी ग्राम पंचायत के अंतर्गत सुदूर वनांचल में स्थित आदिवासी गांव सिरकिया, वाहनों के अचानक पहुंचे काफिले से हैरत में था। लगभग 600 के आसपास की आबादी वाले इस गांव में वैसे तो अनेक चुनाव हो चुके। ऐसी हलचल कभी नहीं थी। इस गांव में कृषि मंत्री कमल पटेल अचानक पहुंचे तो पूरा गांव उमड़ पड़ा। आजादी के बाद सुदूर आदिवासी अंचल के इस गांव में पहुंचने वाले वह पहले मंत्री हैं।

 

प्राकृतिक आपदा के बाद से पटेल गांव-गाँव घूम रहे हैं। उपचुनाव की सरगर्मी में भी कमल पटेल छोटे से छोटे गांव में पहुंच रहे हैं। मध्यप्रदेश में 28 विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं।

मांधाता विधानसभा में भी कांग्रेस विधायक के त्यागपत्र के बाद इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है। राजनीतिक गहमागहमी के बीच मांधाता विधानसभा में जहां मां नर्मदा का पुनासा बांध है वहीं पूरा क्षेत्र ग्रामीण अंचलों को अपने में समेटे हुए है। क्षेत्र में पामाखेड़ी ग्राम पंचायत के अंतर्गत सुदूर में आदिवासी गांव है सिरकिया।

इस गांव की आबादी लगभग 600 के आसपास है। घने जंगल के बीच बसे इस गांव में आजादी के बाद से कोई भी सरकार का कबीना मंत्री या मुख्यमंत्री नहीं पहुंचा था। किसान नेता और मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने रविवार को अपने काफिले के साथ इस गांव में पहुंचे ।

बात कुछ चुनाव की थी लेकिन गांव में निवास करने वाली आदिवासी भाई-बहनों के चेहरे पर मुस्कान थी वह देखने काबिल थी ।गांव में कमल पहुंचे और गांव “कमलमय” ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता पहुंचने के पश्चात पूरा आदिवासी गांव “कमलमय” हो गया। गांव के अधिकांश आदिवासी बंधुओं ने कमल के साथ (कमल भाजपा) का दामन थाम लिया। इस विधानसभा सीट से नारायण पटेल भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी हैं।


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