Bihar Bridge Collapse: बिहार में पुलों के गिरने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि राज्य में अब तक 300 से अधिक पुल गिर चुके हैं, लेकिन सरकार इस समस्या का ठोस समाधान निकालने में विफल रही है। वहीं कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे पटना हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दिया है, जहां 14 मई से इसकी सुनवाई शुरू होगी।
याचिकाकर्ता की मांग और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बिहार सरकार को पुलों की सुरक्षा जांच सुनिश्चित करने और कमजोर पुलों की पहचान कर उनकी मरम्मत कराने का निर्देश देने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि राज्य में पुलों के गिरने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन किसी तरह की निगरानी नहीं हो रही है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने बिहार सरकार की प्रतिक्रिया पर नाराजगी जताई। उन्होंने सरकार के जवाब पर तंज कसते हुए कहा कि हमें पता है, आपके काउंटर का पहला पन्ना हमने पढ़ा है, बिहार के पास ये स्कीम है, वो स्कीम है।
बिहार सरकार की सफाई, पटना हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
बिहार सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए वकील ने बताया कि 10 हजार से अधिक पुलों की निगरानी की जा रही है और राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। हालांकि, याचिकाकर्ता का कहना है कि जांच केवल औपचारिकता होती है और इसमें कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।
इस पर CJI संजीव खन्ना ने कहा कि बेंच ने राज्य सरकार का जवाब पढ़ लिया है और अब यह मामला ट्रांसफर किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मामले को पटना हाईकोर्ट भेजने का निर्णय लिया है। अब पटना हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई 14 मई से शुरू करेगा।
कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह इस मामले को चार सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट में ट्रांसफर करें। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि इस मामले में जो भी जांच और कार्रवाई बिहार सरकार कर रही है, उसकी विस्तृत जानकारी हाईकोर्ट को भी भेजी जाएगी।
बिहार में पुलों के गिरने की कहानी
बिहार में पिछले कुछ वर्षों में कई पुल गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। हाल ही में राज्य में तीन पुल निर्माण के दौरान ढह गए, जिससे राज्य सरकार पर सवाल उठने लगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन घटनाओं के बाद संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें फिर से बहाल कर दिया जाता है।
इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसमें बताया गया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है, जिसके चलते पुलों के निर्माण में भ्रष्टाचार और लापरवाही बढ़ रही है। याचिका में मांग की गई कि बिहार सरकार को एक हाई-लेवल एक्सपर्ट कमेटी गठित करने का निर्देश दिया जाए, जो सभी पुलों की निगरानी करे और कमजोर पुलों की पहचान कर मरम्मत सुनिश्चित करें।
बिहार में पुलों की हालत पर सवाल
राज्य में पुलों की खस्ता हालत को लेकर विपक्ष भी सरकार पर हमलावर है। बिहार में हाल ही में कई पुल गिरने की घटनाएं हुई हैं, जिनमें निर्माण कार्य में लापरवाही और भ्रष्टाचार की बातें सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते पुलों की जांच और मरम्मत नहीं की गई, तो भविष्य में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
हालांकि, बिहार सरकार का कहना है कि वह इस मामले में गंभीर है। लेकिन, कोर्ट की सख्ती से साफ है कि सरकार की अब तक की कार्रवाई पर्याप्त नहीं रही है। अब इस मामले की सुनवाई पटना हाईकोर्ट में होगी, जहां यह देखा जाएगा कि बिहार सरकार पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठा रही है। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट इस मामले में कोई बड़ा निर्देश दे सकता है, जिसमें पुलों के ऑडिट, निगरानी और मरम्मत से जुड़े आदेश शामिल हो सकते हैं।
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