side effects of fast food essay drawing conclusions essays peter nguyen atom essay essays on macbeth act 1 scene 5

Friday 14 Aug 2020 / 6:51 AM

श्रेणी: ब्लॉग

मौत के भय की समाप्ति या व्यवस्था के प्रति तिरस्कार !

  श्रवण गर्ग (वरिष्ठ पत्रकार ) कोरोना प्रभावितों की संख्या ग्यारह लाख को पार कर गई है! हमें डराया जा रहा है कि दस अगस्त के पहले ही आंकड़ा बीस लाख को लांघ सकता है।यानि हम इस मामले में शीघ

पीटीआई को सरकारी धमकी

  हिंदुस्तान में इंदिरा गांधी के घोषित आपातकाल के बाद आज के दौर में मीडिया पर कैसा अघोषित आपातकाल लगा है बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार, लेखक डॉ. वेदप्रताप वैदिक प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया (

तुम जैसे ‘सेल्फी जानवरों’ से बेहतर है पशु !

  मनुष्य की पशुता को कितनी बार भी काट दो, वह मरना नहीं चाहती-हजारी प्रसाद द्विवेदी ने ये बरसो पहले ऐसे ही हथिनी के हत्यारों पर ये पंक्तियाँ लिखी होगी, जो आज भी सही है पिछले तीन द

कोरोना संजीवनी -हमारे हनुमान तो इस समय प्रार्थनाओं में ही उपस्थित हैं

कोरोना संक्रमण के बीच खबर है कि एक आयुर्वेदिक कंपनी की दवाओं के ड्रग ट्रायल को अनुमति दे दी गई है जाहिर है ये प्रयोग गरीबों पर ही होंगे, दूसरी तरफ दुनिया में वैक्सीन बन रहे जिनकी कीमत रईस ही

सभी को सभी से खतरा है…. गरीबों की सुध लीजिये !

  दुनिया एक बार फिर गरीबों की ज़िंदगी के भरोसे है, कोरोना ने ये साबित कर दिया कि सबको समानता का अधिकार जरुरी, कोरोना के जरिये मार्क्सवाद को समझिये सुनील कुमार (संपादक डेली, छत्तीसगढ़