Monday 01 Jun 2020 / 3:57 AM

श्रेणी: ब्लॉग

कोरोना संजीवनी -हमारे हनुमान तो इस समय प्रार्थनाओं में ही उपस्थित हैं

कोरोना संक्रमण के बीच खबर है कि एक आयुर्वेदिक कंपनी की दवाओं के ड्रग ट्रायल को अनुमति दे दी गई है जाहिर है ये प्रयोग गरीबों पर ही होंगे, दूसरी तरफ दुनिया में वैक्सीन बन रहे जिनकी कीमत रईस ही

सभी को सभी से खतरा है…. गरीबों की सुध लीजिये !

  दुनिया एक बार फिर गरीबों की ज़िंदगी के भरोसे है, कोरोना ने ये साबित कर दिया कि सबको समानता का अधिकार जरुरी, कोरोना के जरिये मार्क्सवाद को समझिये सुनील कुमार (संपादक डेली, छत्तीसगढ़

सरकारों के लिए ज़िंदा आदमी से ज्यादा ‘कीमती’ वेंटिलेटर्स,?

  श्रवण गर्ग (वरिष्ठ पत्रकार ) एक सवाल जो अब तक पूछा नहीं गया है और जिसे संवेदनशीलता के साथ उठाया जाना चाहिए वह यह है कि इस समय ‘ज़्यादा’ ज़रूरी क्या होना चाहिए? मशीन कि इंसान ?यहाँ बात

धीमी आंच पर पकी इरफ़ान से वो आत्मीयता और जेएनयू !

  वरिष्ठ पत्रकार,लेखक अविनाश दास  बता रहे हैं इरफ़ान के साथ बिताये पल, अपनापन जो हमेशा उनके चाहने वालों में ज़िंदा रहेगा  धीमी आंच पर चावल चढ़ाने की तरह पान सिंह तोमर रीलीज़ हुई थी।

ट्रम्प पर सितम, मोदी पर करम… ऐ मीडिया, तू ये जुर्म न कर…

  उमेश त्रिवेदी (लेखक सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है) अमेरिका के तथाकथित बे-मुरव्वत, बे-रहम और बे-गैरत मीडिया के शत्रुतापूर्ण सवालों से उत्तेजित अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की